पूजा-पाठ और खान-पान है बनारस की शान

भगवान शिव की काशी को जानने के लिए देश-विदेश के लाखों पर्यटक हर साल आया करते है इस नगरी में पत्थर को भी पारस का दर्जा प्राप्त है,यहां की गंगा -जमुनी तहजीब की दुनिया मिसालें देती है. वरुणा और अस्सी को मिलाकर यहां का नाम वाराणसी पड़ा।अल्हण पन के लिए प्रसिध्द काशी का नाम अलग -अलग समय पर बनारस,वाराणसी कई नामो से जाना जाता रहा है,यहां पर गालियों को बुरा नहीं उसे अभिवादन के रुप में समझा जाता है। गंगा किनारे बसे इस शहर को भगवान शिव ने करीब 5000 साल पहले स्थापित किया था।

                                                                         पर्यटन के लिए खासः
गंगा घाट- गंगा तट के किनारे होने की वजह से यह शहर अपनी विश्व प्रख्यात गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध है,यहां पर गंगा बाकि शहरों के विपरीत उत्तर की दिशा में बहती है,इस नदी के किनारे चौरासी घाट है,इस शहर में कई दर्शनीय स्थल है जो पर्यटको को लुभाते है।

सांस्कृतिक नगरी -काशी को धर्म की नगरी के रुप पर जाना जाता है,इस नगरी में उत्तर भारत का सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र रहा है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है। भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं, जिनमें कबीर, वल्लभाचार्य, रविदास । मोक्ष की नगरी भी इस शहर को कहते है कहा जाता है कि इस जगह मृत्यु के बाद आत्मा सीधे परमात्मा से जुड़ती है,साथ ही चौरासी घाटों में से एक मणिकर्णिका घाट पर शवों का दाह संस्कार किया जाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है,हिन्दुओ के लिए यह मंदिर काफी विशिष्ट स्थान रखता है, ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। संकट मोचन मंदिर की स्थापना कवि तुलसीदास ने की थी,परम्पराओं की माने तो कहा जाता हैं कि मंदिर में नियमित रूप से आगंतुकों पर भगवान हनुमान की विशेष कृपा होती हैं।काल भैरव मंदिर की मान्यता है कि काशी में आने के बाद बाबा काल भैरव का दर्शन पहले करना चाहिए,इन्हे काशी का कोतवाल भी कहा जाता है.

वाराणसी हिन्दू विश्व विद्यालय– इसकी स्थापना पंडित मदन मोहन मालवीय ने बंसत पंचमी के दिन किया था यह एशिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है।इसके प्रांगण में विश्वनाथ का एक विशाल मंदिर भी है जहां पर कॉलेज के छात्रो का हर समय जमावडा़ रहता है।

इस शहर में कुल चार विश्वविद्यालय है -काशी हिन्दू विश्वविद्यालय,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ,संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय,केन्द्रीय तिब्बती शिक्षा समिती। उत्तर भारत का सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र रहा है। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है। भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं, जिनमें कबीर, वल्लभाचार्य, रविदास।

खानपान-कचौडी गली की सुबह वाली कचौडी-जलेबी का नाश्ता हो या गौदोलिया का फालूदा , चौक की चाय या वी टी का कोल्ड कॉफी इस तरीके से खाने पीने के मामले में बनारसियों का कोई तोड़ नहीं है। साथ ही साथ यहां का पान नही खाया तो तो बनारस आना अधुरा रह जायेगा तो चौरसिया का पान जरुर खाईये।