मथुरा में इस तरह से मनाया जाता है हाली का त्योहार

मथुरा। भंग का रंग चड़ा हो चका चक फिर लो रंग लगाये ऐसा रंग लगे सभी को होली फिर बन जाये ऐसा ही नजारा है तीन लोक से न्यारी कही जाने वाली मथुरा नगरी मैं जहाँ पर हर तरफ भंग की मस्ती मैं डूबे दिखाई दे रहे है होली के दीवाने आज है होली और इसमें बैसे तो सारे देश में महिला होली का पूजन करने मैं लगी है

वहीं दूसरी ओर पुरुष होली में मस्त है मगर बात जब ब्रज मैं होली की तो हम यहाँ की प्राचीन रिवाज भोले भंडारी की जड़ी बूटी भांग को कैसे भूल जाए मथुरा में इस समय सभी चतुर्वेदी समाज के लोग लगे है भांग की मस्ती मैं डूबने मथुरा के प्रसिद्ध विश्राम घाट पर लगे है भांग पीने वालों के डेरे यहाँ पर आज सुभह से ही लगता है।

भांग घोंटने का सिलसिला इसमें लोग अपने साथ भांग की पत्ती और काली मिर्च के साथ फलों को भी मिलाकर घोंटते है इस भांग को जब ये तैयार हो जाती है इसको ढूध और पानी मैं मिलाकर काजू बादाम पिस्ता जैसे मेवो के साथ छानते है और फिर भांग को बृज के लोक गीतों के साथ मिलाते है इसको लेकिन जब यमुना महारानी के किनारे बाबा भोले नाथ की बूटी कही जाने वाली भांग की मस्ती चड्ती है तो होली की मस्ती और भी दो गुनी होजाती है और इसको पीने के वाद आँखों मैं पड़ने वाले लाल लाल डोरे और हाथ मैं पिचकारी कर देती है होली के रंग को और भी मस्त रंगीला इसी लिए चतुर्वेदी समाज को वर्ष भर बड़ी ही बेसब्री से होली के त्यौहार का इन्तजार रहता है।

 -योगेश भरद्वाज