अलविदा 2017- जीएसटी का ऐसा था 2017 में बाजार पर प्रभाव

नई दिल्ली। 1 जुलाई 2017 वह तारीख जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की अर्थ व्यवस्था को सुधारने के लिए सबसे बड़ा फैसला लिया था। आजादी के 70 साल बाद सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म जीएसटी लागू किया गया। था। जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विस टैक्स जिसे लगभग सभी तरह के इनडायरेक्ट टैक्स को रिप्लेस किया गया। जीएसटी लागू करने से पहले बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि इससे व्यापारियों की जिंदगी आसान और आम आदमी की जिंदगी बेहतर बनेगी। लेकिन क्या ऐसा हुा है इसको लेकर कई तरह के मत हैं जीएसटी को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि जीएसटी से देश की अर्थ व्यवस्था सुधरी है वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जीएसटी से आम लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है।

बता दें कि जीएसटी की वजह से अगर किसी पर सबसे ज्यादा प्रभाव है तो कारोबारियों और बाजार पर जीएसटी से बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। क्योंकि दीवाली पर घर सजाना हो या घर के लिए सस्ती बजट शॉपिंग करनी हो दिल्ली के सदर बाजार से सस्ती और अच्छी और कोई हो नहीं सकती। इस बाजार में छोटी- बड़ी करीब 50 हजार दूकानें है। इनमें होलसेल और रिटेल ट्रेड्रर्स दोनों ही शामिल है। यहां खरीदारों को मजमा लगा रहता है। छोटे-मझोले व्यापारी दूर-दूर से यहां खरीदारी करने आते है। लेकिन अब व्यापारियों और आम लोगों पर जीएसटी का असर दिख रहा है।

दरअसल जीएसटी को लेकर कारोबारियों की दलील है कि जीएसटी में टैक्स पर पूरी तरह से सफाई नहीं दी गई है। किस सामान पर कितना टैक्स लगाया जा रहा है इसको लेकर भी कंफ्यूजन बना हुआ था। जीएसटी में सारी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है और ऐसे में कई कारोबारियों को कंप्यूटर चलाना नहीं आता है। साथ ही रिटर्न भरने के लिए अकाउंटेंट जरूरी है और इन सभी कारणों से कारोबारियों की लागत बढ़ रही है। कागजी कार्रवाई बढ़ गई है। ना ही इन्हें समय पर जीएसटी नंबर मिल रहा है।

वहीं जीएसटी के बाद कई सामानों के दाम बढ़े है और रेस्त्रां में खाना महंगा हुआ है। मौजूदा समय में भी जीएसटी को लेकर लोगों के सामने कई तरह की दिक्कतें बनी हुई है। इनवॉइस मैचिंग और इनवॉइस अपलोड करने में दिक्कतें आ रही है। वहीं ट्रांजिशन क्रेडिट क्लेम, फाइनल रिटर्न दाखिल करने और रिटर्न अपलोड में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रिटर्न अपलोड के बाद कई घंटों में प्रोसेसिंग होने की शिकायत है। एसईजेड को बिक्री के मामले में गलती का मैसेज मिला है। जीएसटीएन पोर्टल स्लो काम करता है।

साथ ही जीएसटी में इन सभी दिक्कतों के बाद लेकर कारोबारियों की मांग है कि सरकार से बिजनेस मॉडल के आकलन के लिए समय चाहिए। कंपोजिशन स्कीम की जरूरतें पूरी करने के लिए भी समय की जरुरत है। इतना ही नहीं जीएसटी से भगवान को भी खूश करना मुश्किल हो रहा है। पूजा की थाली से लेकर पूजा साम्रगी पर अलग- अलग जीएसटी दरें लगाई गई है। मूर्तियों पर जीएसटी का रेट ज्यादा है जबकि सिरेमिक की मूर्तियां भी मंहगी हो गई है।