उत्तराखंड विधानसभा से GST को मिली हरी झंडी

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को सर्वसम्मति से माल एवं सेवा कर जीएसटी बिल पास हो गया। जीएसटी बिल को लेकर बुलाये गये विशेष सत्र के पहले दिन सोमवार को संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने बिल को सदन पटल पर पेश किया था।

जीएसटी लागू होने के साथ ही राज्य में 17 प्रकार के करों की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और इसके एवज में सिर्फ माल एवं सेवा कर वसूला जाएगा। अल्कोहल और पेट्रोलियम पदार्थ समेत छह वस्तुओं को अगले पांच साल तक के लिए जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। इन सभी पर वैट बरकरार रहेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि एकल कर प्रणाली से राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी संभव हो सकेगी। कर के चार स्लैब प्रस्तावित हैं और किस वस्तु पर कौन सा स्लैब लागू होगा इसका निर्धारण जीएसटी काउंसिल करेगी।

विधेयक में अधिकारियों को बकाया वसूली, निरीक्षण, तलाशी, अभिग्रहण और गिरफ्तारी की शक्तियां देने का कानूनी प्रावधान है। अपीलों की सुनवाई के लिए अपील अधिकरण की स्थापना करने तथा मुनाफाखोरी पर रोक के लिए प्रावधान है। विधेयक में वित्तीय अभिलेख बदलने या उसमें झूठे तथ्य दर्शाने के दोषी को छह महीने तक का कारावास और दोष सिद्ध व्यक्ति के दोबारा दोषी पाए जाने पर पांच की जेल का प्रावधान किया गया है। बाकायदा एक अधिकरण का गठन होगा। 10 लाख रुपये के टर्नओवर वाले व्यापारी एसजीएसटी के दायरे में शामिल होंगे। राज्य में 97,907 डीलर्स हैं जिसमें से अब तक 75478 डीलर्स पंजीकरण करा चुके हैं और यह 78 प्रतिशत है।

आबकारी ड्यूटी में केन्द्र व राज्य के प्रतिशत तय

उत्तराखंड में उद्योगों की दशा बहुत अच्छी नहीं है। औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल से तमाम इकाइयां भाग रही थी,लेकिन सरकार ने उनके लिए एक व्यवस्था प्रारंभ की है,जिसका लाभ उद्योगों को मिलेगा। एसजीएसटी लागू होने के बाद सिडकुल के तहत स्थापित निर्माण इकाइयों को आबकारी ड्यूटी तो अदा करनी होगी मगर केंद्र 58 फीसदी और राज्य 42 फीसदी इसे लौटाएंगे। ये सुविधा 2020 तक मिलेगी।

कर वसूली में भी होगी बढ़ोत्तरी

उत्तराखंड जहां अधिकांश वन्य क्षेत्र हैं और भौगोलिक करणों से यहां पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े उद्योग नहीं लगाए जा सक ते हैं,लेकिन अब इस हानि पर अंकुश लगेगा। राजस्व हानि की प्रतिपूर्ति के लिए एसजीएसटी में वर्ष 2015-16 को आधार वर्ष निर्धारित किया गया है। इसके तहत 14 प्रतिशत राजस्व वृद्धि के आधार पर राज्यों को प्रतिपूर्ति करने की व्यवस्था है। 2015-16 में राज्य ने 6096.24 करोड़ राजस्व जुटाया था। करीब 17-18 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर से 2016-17 में यह 7143.35 करोड़ रुपये हो गया।