कार्मिक को लुभाने के लिए तैयार रावत सरकार

देहरादून। उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य सरकार द्वारा लोगों को लुभाने के लिए वायदों की झड़ियां लगाई जा रही है। जनता के अलावा राज्य सरकार, सरकारी कर्मचारियों पर भी मेहरबान होती दिख रही है। प्रदेश के सरकारी कार्मिकों को सातवें वेतनमान का फायदा इस साल से मिलने लगेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले सप्ताह सातवां वेतन समिति अपनी सिफारिशे राज्य सरकार को सौंप सकती है, जिसके बाद जनवरी 2017 के पहले सप्ताह में मंत्रिमंडल इस पर मुहर लगा सकता है। अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपने के लिए समिति ने वेतन की विसंगतियों को दूर करने में आने वाले खर्च का आंकलन करना शुरू कर दिया है।

छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर पूरे प्रदेश की कार्मिक संगठनों की निगाहें टिकी हुई है। बता दें कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य कर्मचारी परिषद ने समिति अध्यक्ष इंदु कुमार पांडे से मुलाकात कर आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंपने का अनुरोध कर चुकी है।

harish-rawat

क्या होगा चुनावों पर असर
प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कार्मिकों के वेतन में इजाफा होना, चुनावों में रावत सरकार के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। जानकारों का मानना है कि कार्मिक कर्माचारी इससे खुश होकर कांग्रेस को वोट दे सकते हैं।

खाली है राजकीय कोष
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक उत्तराखण्ड का राजकीय कोष वर्तमान समय में खाली पड़ा है। ऐसे समय में अगर कार्मिक कर्मचारियों का वेतन बढ़ता है तो पैसा कहां से आएगा ये बड़ा सवाल है।

किसे नफा, किसे नुकसान
कार्मिकों का वेतन बढ़ाने को यदि राजनैतिक चश्मे से देखा जाए तो रावत सरकार ने लोगों का मन भी मोह लिया और उसे इसकी कीमत भी नहीं चुकानी पड़ेगी। ऐसा इसलिए कहां जा रहा है क्योंकि यदि आगामी चुनाव में हरीश रावत हार जाते हैं तो जो भी पार्टी सत्ता की कमान संभालेगी उसे इस वादे को पूरा करना पड़ेगा। सत्तासीन पार्टी ऐसा नहीं करती है तो उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा।