गोरखपुर मामले में डॉक्टर कफील के बारे में एक और खुलासा

गोरखपुर। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक वॉर्ड के पूर्व इंचार्ज डॉक्टर कफील खान को लेकर पीड़ित परिजनों ने एक खिलाफ किया है। जिसमें उनका कहना है कि मेडिस्प्रिंग अस्पताल के कैलेंडर गांव-गांव में बांटे गए। पोस्टर्स में कफील की फोटो भी लगी है। बीआरडी में हुई बच्चों की मौतों के चलते पेट्रियोटिक वार्ड के नोडल ऑफिसर डॉक्टर कफील खान को उनके पद से हटा दिया गया है। कैलेंडर का गांव-गांव में बांटना कोई हैरानी की बात नहीं है हैरानी तो इस बात की है कि अगर डॉक्टर कफील इस अस्पताल में प्रेक्टिस नहीं करते तो कैलेंडर में उनकी फोटो क्यों लगी थी।

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बता दें कि पीड़ित परिवार का कहना है कि बीते शुक्रवार को डॉ. कफील वॉर्ड नंबर पांच में आए और डॉक्टरों के कान में कुछ कहने लगे जिससे डॉक्टर हरकत में आ गए। उस वक्त 11 साल की वंदना भी वॉर्ड नंबर 100 में भर्ती थी। रात भर उसकी दएखभाल कर रहे उसके चाचा वहां मौजूद थे। उमेश ने बताया कि जब रात में गैस खत्म हो गई तो डॉक्टर ने उनसे वंदना को मेनुअल पंप के जरिए ऑक्सीजन देने को कहा। रात भर बैठे-बैठे उमेश भतीजी की सांसे गिनता रहा। सुबहा एक डॉक्टर ने वंदना की मशीन हटा दी उसका बदन पीला पड़ गया था जैसे वो गहरी नींद में सो रही हो।

वहीं उमेश का कहना है कि उन्होंने कफील को तब पहचाना जब उसकी फोटो मीडिया में चलती दिखी। तस्वीर देखकर उमेश को याद आया कि ये वहीं डॉक्टर है जो सुब के वक्त वॉर्ड में आया था और उसके माथे पर पसीना था। कफील ने डॉक्टरों के कान में कुछ ऐसा कहा जिससे बाकी के डॉक्टर हरकत में आ गए। यहां तक की जो डॉक्टर मजे की नींद सो रहे थे वो भी जल्दी से काम पर लग गए। डॉक्टरों में इस तरह की अफरातफरी मची हुई थी की डॉक्टरों ने मरीजों की मशीने वापस लगा दी गई।

वहीं पीड़ित परिवार के सदस्य छोटे लाल का कहना है कि जब वह सुबह वार्ड के अंदर आया तो एक डॉक्टर ने उससे कहा कि वंदना की मृत्यु हो चुकी है और वह चुपचाप पीछे के दरवाजे से वंदना की बॉडी को ले जाए। डॉक्टर ने यह भी हिदायत दी कि इस दौरान किसी से बातचीत ना करे।