नीतीश सरकार के सुशासन की निकली हवा, फुलवारी शरीफ में हुई व्यापारी की हत्या

पटना। बिहार में नीतिश सरकार भले सुशासन के लाख पुख्ता दावे करे लेकिन हालते तस्वीर कुछ और ही दांस्तान बयां कर रहे हैं। अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि सूबे की राजधानी से महज चंद फासले पर स्थित फुलवारी शरीफ में एक व्यवसायी की हत्या कर उसकी लाश उसके घर से 5 सौ मीटर के फासले पर फेंक दी। जिसके बाद से नीतिश सरकार और सूबे के साथ जिले के पुलिस प्रशासन के सुशासन पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गया है।

फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र के जय हिंद कॉलोनी में अपराधियों ने शुक्रवार की रात व्यवसायी जितेन्द्र कुमार को अगवा कर उनकी हत्या कर दी। हत्या कर व्यवसायी जितेन्द्र कुमार के शव को उनके आवास के समीप ही एक खेत में फेंक दिया। रविवार सुबह व्यापारी का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। लोग बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गये। घटना की सूचना पर पुलिस ने मौके से शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

मौकाए वारदात पर मृतक के पास मिले कई सबूतों ने इस बात की ओर पूरा संकेत दिया की मृतक की हत्या गला दबा कर हुई है। क्योंकि मृतक के नाक से खून निकला हुआ था। जिसके बाद घटना स्थल की छानबीन करने पर पुलिस को कई अहम सुराग मिलें हैं। फिलहाल मृतक के परिजनों के बयान पर अज्ञात के नाम मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मृतक जितेन्द्र कुमार के परिवार में एक 12 साल की बेटी और एक पत्नी है।

सूत्रों की माने तो जीतेन्द्र कुमार वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। चूंकि जनता में सहज और सज्जन स्वभाव के चलते लोगों के बीच जीतेन्द्र कुमार का अपना अलग स्थान बन गया था। जिसकों देखकर इनकी राजनीति प्रतिस्पर्धा के चलते किसी ने ये कारनाम कर इनकी हत्या करा दी है। बताया जा रहा है कि हत्या की रात जीतेन्द्र कुमार देर शाम किसी काम से घर से निकले थे लेकिन वो लौटकर नहीं आये घर वालों ने काफी खोज की । लेकिन सुबह ग्रामीणों ने बताया घर से महज चंद कदम पर खेत में उनकी लाश पड़ी हुई है।

लोगों की माने तो फुलवारी शरीफ प्रखंड़ कार्यालय में जीतेन्द्र कुमार की पेंट की एक दुकान थी । जो कि इनके परिवार के भरण-पोषण का एक मात्र जरिया थी। परिवार में 3 भाईयों में जितेन्द्र कुमार सबसे छोटे थे । बड़े भाई फुलवारी शरीफ के नगर परिषद में क्लर्क है तो दूसरा भाई बोकारो में व्यवसायी है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि इस मालमे में हर पहलू की जांच की जायेगी।

अब पुलिस प्रशासन और सरकार चाहे जितनी जांच करे लेकिन परिवार का मुखिया ही जब नहीं रहा हो तो जांच का फायदा क्या। अगर सरकार ने पहले से ही सुशासन की बातें और दावे केवल मंचों और कागजों के बजाय हकीकत में जनता के बीच रखे होते तो शायद जीतेन्द्र कुमार अपने परिजनों के साथ होते।

अजस्र पीयूष, संवाददाता