375 किमी की मानव श्रृंखला बनाकर गोण्डा जिले ने रचा इतिहास

गोण्डा। उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले ने चुनावी इतिहास में पौने चार लाख लोगों से 375 किमी की मानव श्रृंखला बनाकर आज एक नया इतिहास रच दिया। ये रिकार्डतोड़ आयोजन ज़िले के युवा डीएम आशुतोष निरंजन व उत्साही एसपी सुधीर सिंह के जोश से सम्भव हुआ। आज ठीक दोपहर 12 बजे ज़िले के 17 स्थानों पर गुब्बारे छोड़ पूर्व से पंक्ति में खड़े युवा महिला पुरुषों व स्कूली छात्र छात्राओं ने हाथों में हाथ डालकर विशाल मानव श्रृंखला का सृजन करके एक अभूतपूर्व चुनावी रिकार्ड बनाया। सुव्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता “स्वीप” के तहत शतप्रतिशत मतदान हेतु प्रोत्साहन के क्रम में मतदाता जागरूकता के लिए इस ऐतिहासिक मानव श्रृंखला का आयोजन हुआ।

चुनावी इतिहास में मतदान हेतु मानव श्रृंखला के इतने विशाल मानव श्रृंखला कार्यक्रम का आयोजन पूरे हिँदुस्थान में आज तक कभी नहीं हुआ। ज़िले के सभी चारों तहसीलों के सघन ग्रामीण क्षेत्रों करनैलगंज, परसपुर, बेलसर, तरबगंज, नवाबगंज, टिकरी, मनकापुर, दतौली, धानेपुर, बाबागंज, इटियाथोक, भवनियापुर, खरगूपुर, गोकरन शिवाला, आर्यनगर, कौड़िया व कटारा बाज़ार होते हुए यह मानव श्रृंखला वापस अपने शुरुआती बिंदु करनैलगंज चौराहे पर मिल गयी। इसके अलावां दो अन्य श्रृंखलाएं भी बनीं, एक मानव श्रृंखला गोण्डा – लखनऊ राजमार्ग पर बहराइच सीमा से गोण्डा शहर होते हुए बलरामपुर मार्ग पर गोण्डा-बलरामपुर सीमा तक व् दूसरी मानव श्रृंखला बहराइच – इलाहाबाद स्टेट हाइवे पर बहराइच सीमा से गोण्डा शहर होते हुए फैज़ाबाद सीमा तक बनी। इसमें शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के पौने 4 लाख लोगों ने सहभाग किया।

10 मिनट के लिए बनी इस ऐतिहासिक मानव श्रृंखला के लिए आधे घण्टे पूर्व ही भारी जनमानस अपनी अपनी जगहों पर पंक्ति बनाकर खड़े हो गए और ठीक 12 बजते ही बढ़चढ़कर मतदान करने के नारों के साथ सभी ने मानव श्रृंखला का निर्माण किया। इस बीच पूरे ज़िले में एक घण्टे के लिए ट्रैफिक जाम हो गया इस जाम में फंसे वाहनों में बैठे यात्रियों ने भी मानव श्रृंखला में सहभाग किया। इस नए इतिहास को गिनीज बुक ऑफ वर्ड रेकॉर्ड में दर्ज कराने के विषय पर डीएम निरंजन ने बताया कि गिनीज़ वालों के 6 लाख रूपये फीस की अनुपलब्धता के चलते इसका दर्ज हो पाना संभव न हो पाना बताया। इससे यह भी सिद्ध  हो गया कि आज के वैश्विक युग में प्रतिभाएं व विशेषताएं भी लक्ष्मी यानी अर्थ का गुलाम हैं।

 -विशाल सिंह