राजपूताना ठाठ देखना हो तो जरुर जाएं जोधपुर

नई दिल्ली। पद्मावती विवाद के चलते राजस्थान एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विवाद को देखकर ही आप समझ सकते हैं कि यहां के लोग अपनी परंपरा और और इतिहास का कितना ख्याल रखते हैं। इन सबको किनारे हटाते हुए आप राजस्थान के रजवाड़ों की जगह में घूम सकते हैं। इसमें एक खास शहर है जोधपुर।

 

जोधपुर भारत के राज्य राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा नगर है।जोधपुर थार के रेगिस्तान के बीच अपने ढेरों शानदार महलों, दुर्गों और मन्दिरों वाला प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। जोधपुर की एक खास बात ये भी है कि चमकते सूर्य वाले मौसम होने के कारण इसे सूर्य नगरी भी कहते हैं।

मेहरानगढ़ का किला-

मेहरानगढ़ का किला पहाड़ी के बिल्‍कुल ऊपर बसे होने के कारण राजस्‍थान के [1]सबसे खूबसूरत किलाओं में से एक है।किले के अंदर में भी पर्यटकों को देखने हेतु कई महत्‍वपूर्ण इमारतें हैं। जैसे मोती महल, सुख महल, फूलमहल।

उम्‍मैद महल-

मार्बल और बालूका पत्‍थर से बने इस महल का दृश्‍य पर्यटकों को खासतौर पर आकर्षित करता है। इस महल के संग्रहालय में पुरातन युग की घड़ियां और पेंटिंग्‍स भी संरक्षित हैं। इस महल की एक खास बात ये है की यही एक ऐसा बीसवीं सदी का महल है जो बाढ़ राहत परियोजना के अंतर्गत निर्मित हुआ। जिसके कारण बाढ़ से पीड़ित जनता को रोजगार प्राप्त हुआ। यह महल सोलह वर्ष में बनकर तैयार हुआ।

मंडौर गार्डन-

राजपूताना वैभव का केंद्र रहे जोधपुर से मात्र 9 किमी दूर एक ऐतिहासिक स्थान मौजूद है जिसको मंडोर गार्डन के नाम से पुकारा जाता है। इसी के नाम पर एक ट्रैन का नाम भी रखा गया है-मंडोर एक्सप्रेस जोकि दिल्ली से जोधपुर के लिए चलती है।मंडोर गार्डन एक विशाल उद्धान है। जिसे सुंदरता प्रदान करने के लिए कृत्रिम नहरों से सजाया गया है। जिसमें ‘अजीत पोल’, ‘देवताओं की साल’ व ‘वीरों का दालान’, मंदिर, बावड़ी, ‘जनाना महल’, ‘एक थम्बा महल’, नहर, झील व जोधपुर के विभिन्न महाराजाओं के समाधि स्मारक बने है।