रामनगरी में राम विवाह की मची धूम, दूल्हा बने राजा राम

अयोध्या। देखन चलो मडउवा मिथिलेश नंदनी को के पद गायन के साथ रामनगरी में विवाहोत्सव अपने चर्मोत्कर्ष पर जा पहुंचा है। विवाह पंचमी को लेकर रामनगरी में अपार तैयारियां की जाती हैं। खान-पान से लेकर विवाह में वस्त्र आभूषणों के अलावा होने वाले अन्य कार्यक्रमों के लिए मंदिरों में महीनों से तैयारियां चलती हैं।

वस्त्रों की साज-सज्जा

विवाहोत्सव के लिए इस दौरान मंदिरों में ठाकुर जी के वस्त्रों के साथ अन्य बारात के लोगों के वस्त्रों को पारम्परिक तौर पर कारीगर मंदिरों में आकर तैयार करते हैं। अलग-अलग शैलियों में ठाकुर जी और अन्य लोगों के वस्त्रों को तैयार किया जाता है। जिसमें राजस्थानी,बुंदेलखंडी और पारम्परिक भारतीय परिधानों को ही महत्व दिया जाता है।

खान-पान की विविधता

विवाह पंचमी के पहले ही मंदिरों में इसको लेकर व्यापक तौर पर तैयारियां होती हैं। इस दिन के पहले ही यहां पर कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इन रस्मों रिवाजों के लिए तरह-तरह के व्यंजनों और पकवानों को बनाने का काम किया जाता है। इस पर्व के लिए खास तौर पर मिठाई और नमकीन के साथ तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इस पकवानों को मंदिर के भीतर ही साधुओं और संतों की देखरेख में बड़े-बड़े कारीगर तैयार करते हैं।

मंदिरों की साज-सज्जा

इस पर्व को लेकर मंदिरों में सारी तैयारियों के साथ ठाकुर जी के विवाह के पहले मंदिरों में साज-सज्जा की भव्य तैयारियां की जाती हैं। इसे मंदिरों का रंग-रोगन का काम करने के साथ झालरों और फूलों से सजावट की जाती है। इसके साथ ही भव्य पर्दों को लगाकर मंदिर की सजावट में चार चांद लगा दिए जाते हैं। इस दिन को लेकर होने वाले कार्यक्रमों के हिसाब से मंदिरों में सजावट की जाती है।

रस्मों और रिवाजों का पारम्परिक दर्शन

ठाकुर जी के विवाहोत्सव को लेकर तैयारियों के साथ पारम्परिक रीति रिवाजों का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। ठाकुर जी के टीके से इस विवाहोत्सव की शुरूआत की जाती है। इस दिन से मंदिरों में सोहर और बधाई गीतों का पारम्परिक गायन किया जाने लगता है। मंदिरों में आने वाले भक्त दो पाली में बंट जाते हैं। एक भाग किशोरी जी का परिवार बन जाता है। तो दूसरा भाग ठाकुर जी का इसके बाद दोनों पक्षों में हंसी मजाक के साथ गीत संगीत के बीच रम्में होती हैं। जैसे हल्दी मेंहदी संगीत की पूरी रस्म निभाई जाती है। इसके बाद विवाह पंचमी के दिन भगवान अपने अनुजों के साथ बारात की तैयारी कर सजधज कर निकलते हैं। रात्रि काल में शुभ लग्न महूर्त में विवाह पूरे पारम्परिक रीति रिवाज से सम्पन्न कराया जाता है।