नोटबंदी से जीडीपी को बढ़ावा मिलेगा : पीयूष गोयल

नई दिल्ली| नोटबंदी से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर बुरा असर पड़ने की अर्थशास्त्रियों की भविष्यवाणी से केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने असहमति जताई है। उन्होंने शनिवार को कहा कि उच्च मूल्य के नोटों पर प्रतिबंध के बाद जब अनौपचारिक अर्थव्यवस्था औपचारिक रूप लेगी तो यह जीडीपी में और इजाफा करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि 500 और 1000 रुपये के नोट वैध मुद्रा के रूप में रद्द किया जाना केंद्र सरकार के सिलसिलेवार ढंग से लिए गए कई फैसलों का हिस्सा है, जिन्हें उसने कालेधन पर अंकुश लगाने व भ्रष्टाचार रोकने के लिए ढाई वर्ष के शासनकाल में लिया है।

piyush-goyal

बिजली, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मंत्री गोयल ने कहा, “मेरा मानना है कि नोटबंदी ने अब तक इस पर अंकुश लगाया है। उन्होंने कहा, “मैं कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों के उस तर्क को नहीं समझ पा रहा हूं, जो कह रहे हैं कि नोटबंदी से जीडीपी पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। गोयल ने कहा, “यदि आप अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक अर्थव्यवस्था में ले जाते हैं और ऐसे लेन-देन जो वर्षो से कभी भी जीडीपी में शामिल नहीं हुए, उससे तो जीडीपी में कमी नहीं बल्कि केवल इजाफा होगा।उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था का नीचे की ओर जाना एक-दो माह या एक तिमाही तक रहेगा।

उन्होंने कहा कि कुछ जो उपभोग करने की योजना स्थगित कर देंगे बाद में वह एक तिमाही में पूरी हो जाएगी। गोयल ने हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप में कहा, “जब आठ नवंबर को यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया तो हम लोगों ने स्पष्ट तौर पर बोल दिया था कि यह ऐसी चीज है, जिसमें करीब 50 दिनों तक तकलीफ उठानी पड़ेगी। एक संक्रमणकाल होगा, क्योंकि लोगों को पहले की धारणा बदलनी होगी। लोगों ने जबर्दस्त समर्थन दिया है।संसद में नोटबंदी पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “जब हमलोग परंपरा के तहत संगठित लूट की विरासत को ठीक करने में लगे हैं तब मैं संगठित लूट की टिप्पणी से आश्चर्यचकित हूं। मैं नहीं जानता कि 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपये का कोयला घोटाला असंगठित लूट था या नहीं।

गोयल ने नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन के भारत के हाल के नोटबंदी के कदम को ‘असामान्य’ करार देने की भी आलोचना की। पॉल ने यह भी कहा था कि इस उपाय से पर्याप्त लाभ पाना कठिन होगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा, “मैं नहीं समझता कि नोबेल संस्थान आपको ऐसा प्रमाण-पत्र देता है कि आप जो भी कहेंगे हमेशा सही ही होगा।”