बुनकरों को हथकरघा से सम्बंधित सामान के सहायतार्थ दिया गया अनुदान

वाराणसी।काशी में आयोजित दूसरे राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त को केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने हथकरघा संवर्धन सहायता की घोषणा की थी। इसी कार्यक्रम के अंतर्गत शहर के चौकाघाट स्थित बुनकर सेवा केंद्र में गुरूवार को हथकरघा संवर्धन सहायता और उपकरण आपूर्ति आदेश कैम्प का शुभारम्भ वस्त्र मंत्रालय की सचिव रश्मि वर्मा ने किया।

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इस मौके पर 500 बुनकरों को हथकरघा से सम्बंधित सामान के सहायतार्थ अनुदान दिया गया साथ ही इस अनुदान का ट्रांजेक्शन कैशलेस तरीके से किया गया। इस योजना का राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही शुभारम्भ किया था।

इस मौके पर बोलते हुए वस्त्र मंत्रालय की सचिव रश्मि वर्मा ने बताया कि ‘ आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हथकरघा संवर्धन योजना का शुभारम्भ हुआ है। जिसमे हथकरघा और कालीन के कारीगरों को हम सीधे सप्लायारोंस से सामान खरीदने का कैम्प लगाया गया है। इसमें हमारे चयनित 500 बुनकर यहां सीधे सप्लायर्स से खरीदारी कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह योजना पूरी तरीके से कैशलेस होगी ताकि यह अनुदान सीधे लाभार्थी के अकाउंट में जाए। यह कार्य बिचौलियों को ख़त्म करने के लिए किया गया है।

हथकरघा संवर्धन सहायता के अंतर्गत आज बनारस में 501 करघों / सहायक पुर्जों जिसमे 151 फ्रेम करघा, 231 जैकार्ड और 119 मोटर युक्त जैकार्ड सम्मिलित है के आदेश आपूर्तिकर्ता को बुनकरों ने 10 प्रतिशत वित्तीय अनुदान ऑनलाइन तरीके से मोबाइल के द्वारा किया। इस आयोजन में आये बुनकर खुस दिखे तो कईयों ने इस क़दम को सही बताया पर नोट बंदी से खुद को परेशान बताया।

लोहता के रहने वाले बुनकर तारिक ने 45 दिन यहां प्रशिक्षण प्राप्त करके 60 चौके और 50 चौके वाली दो जैकार्ड का ऑर्डर दिया है। उन्होंने बताया कि ‘ हमें बुनकारी के ज़्यादातर सामान ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से मिल जा रहे है पर हमारी मज्दोरी हमें नहीं मिल रही है। हमें एक 5 मीटर की साड़ी के लिए एक हफ्ते हथकरघे पर काम करना होता है। जिसकी मजदूरी 200 रूपये मिलती है। यह मजदूरी हमें देने के लिए अभी हमारे उपर के लोग देने में असमर्थ है जिसकी वजह से ज़्यादातर करघे बंद चल रहे है और 90 प्रतिशत बुनकर भुखमरी की कगार पर है।

सौरभ श्रीवास्तव, संवाददाता