बाड़मेर रिफाइनरी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने सरकार पर लगाए आरोप

जयपुर। राजस्थान के बाड़मेर जिले में लगने वाली रिफाइनरी को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। एमओयू के दौरान केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। इसका जवाब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 19 अप्रैल को दिया।

 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जन दबाव के चलते भाजपा सरकार को रिफाइनरी लगाने के लिए समझोता-ज्ञापन करना पड़ा। पत्रकारों के साथ चर्चा करते हुए गहलोत ने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि रिफाइनरी को लेकर केन्द्र और राज्य सरकारें अर्द्धसत्य का सहारा ले रही है। दोनों ही सरकारें यह नहीं बता पा रही है कि आखिर 40 हजार करोड़ कम कैसे हुए है। पेट्रोलियम मंत्री को यह सिद्ध करना था आखिर इतनी राशि कम कैसे हुई है। उन्होंने कहा कि इसके आंतरिक परिणाम क्या होंगे, प्रदेश को रिटर्न क्या मिलेगा इन सब बातों के लिए समझौता जनता के सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि चार साल की देरी के कारण प्रदेश के राजस्व के साथ-साथ रोजगार का भी नुकसान हुआ है।

मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की कभी रिफाइनरी को लेकर रूचि नहीं रही, और रिफाइनरी को लेकर उन्होंने लापरवाही बरती। उन्होंने कहा कि अगर पहला वाला एमओयू घाटे का सौदा था तो केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री को जांच करवानी चाहिए कि पूर्ववर्ती सरकार को गुमराह क्यों किया गया। अच्छा यह रहेगा कि दोनों एमओयू को लेकर श्वेत पत्र जारी करके जनता के सामने सच्चाई पेश की जाए।

उन्होंने कहा कि अगर बाड़मेर रिफाइनरी प्रोजेक्ट को चार साल और देरी से शुरू किया जाए, तो शायद 1123 करोड़ भी प्रतिवर्ष राज्य सरकार को नहीं देने पड़े। पूर्व सीएम ने कहा कि हमारी सरकार के वक्त क्रूड ऑयल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 115 डॉलर प्रति बैरल थी जो अब घटकर 45 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। उन्होने कहा कि अब केंद्र सरकार की नई नीति के चलते सब्सिड़ी भी खत्म हो गई है और तेल कंपनियों को तेल की कीमतें बढ़ाने को लेकर अधिकार दिए गए है। पूर्व सीएम ने अंबाबाड़ी से लेकर सीतापुरा तक मेट्रो प्रोजेक्ट, परबन सिंचाई प्रोजेक्ट, समेत अन्य परियोजनाओं को लेकर भी वसुंधरा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को रिसर्जेंट राजस्थान के वक्त हुए एमओयू को लेकर भी मीडिया के सामने बयान देना चाहिए था।

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने यह भी आरोप लगाया हमारे कार्यकाल में शुरू की गई मेट्रो, परबन सिंचाई और डूंगरपुर- बांसवाड़ा ब्रॉडगेज जैसी बड़ी योजनाओं को सरकार ने जानबूझकर लटका रखा है।