सियासत में कोई दोस्त नहीं होता, कोई दुश्मन नहीं होता !

लखनऊ। किसी ने सही ही कहा है कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता…यह बात आज के हालिया परिवेष को देखकर और सार्थक हो जाती है। यहां हम बात कर रहे हैं स्वामी प्रसाद मौर्य की जो कभी बसपा प्रमुख मायावती के खास हुआ करते थे और आज उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है।

Mayawati_maurya

सियासत में कोई दोस्त नहीं होता ,कोई दुश्मन नहीं होता इस बात को सही साबित करने वाले मौर्या आज गाजेबाजे के साथ भाजपा के सदस्य बन गए हैं। कल तक यही भाजपा मौर्य को फूटी आंख नहीं सुहाती थी, लेकिन आज मौर्य उसी भाजपा के मंच से मायावती को आइना दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद मौर्य ने कहा कि जिस दिन मैंने इस्तीफा दिया उस दिन बसपा तीसरे नंबर पर चली गई और आज जब मैंने भाजपा ज्वाइन किया तो बसपा पूरी तरह खत्म हो गई।

जहां एक ओर भाजपा को मौर्य की मौजूदगी से उत्तर प्रदेश में दम भरने का भरोसा है, वहीं मौर्य भी अपनी इस नई सियासी चाल से विरोधियों को चारों खाने चित करना चाहते हैं। सियासी गलियारों में खबर ये भी है कि बसपा छोड़ने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने सबसे पहले अपनी पार्टी बनाने पर विचार किया था, और भाजपा के साथ गठबंधन कर अपना दल की तरह यूपी विधानसभा चुनाव में जाने का प्लान बनाया था। लेकिन स्वामी के इस प्लान को अमित शाह और ओम माथुर ने मंजूरी नहीं दी। इसके बाद स्वामी प्रसाद मौर्य के पास भाजपा में शामिल होना ही एकमात्र विकल्प बचा था।

कभी भाजपा को रोकने के लिए भरा था दम:-

यह वीडियो पुराना है जब मौर्य को भाजपा फूटी आंखों नहीं सुहाती थी। उस वक्त मौर्य ने भाजपा को सांप्रदायकि ताकत बताते हुए उसे रोकने का दम भरा था। उस वक्त मौर्य ने कहा था कि वह भाजपा को किसी कीमत पर मनमानी करते हुए अराजकता नहीं फैलाने देंगे। मौर्य उस वक्त भाजपा को समाज को बांटने वाली पार्टी के तौर पर देखते थे।

(वीडियो साभार)

कुर्मी वोटों पर भाजपा की निगाह:-

खबर है कि भाजपा पूर्व बसपा नेता के ऊपर दांव इसलिए लगा रही है, क्योंकि पार्टी नेतृत्व को लगता है की केशव मौर्य की तुलना में स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी कुर्मी जाति के बड़े नेता हैं और उनका कुर्मी वोटर पर ज्यादा प्रभाव है। पार्टी यह बात अच्छे से जानती है कि यूपी में कुर्मी जाति के लगभग 6 प्रतिशत वोट बैंक है, जिसका पूर्वी उत्तर प्रदेश की 100 से ज्यादा सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव है।

माया को बताया था धन्ना सेठों की प्रेमी:-

मायावती पर वार करते हुए मौर्य ने कहा था कि कार्यकर्ताओं की जगह मायावती को धन्ना सेठों से अधिक लगाव है। उन्होंने कहा था कि अगर टिकट को बेचा नहीं गया होता तो जनाधार बढ़ा होता। समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर धन्नासेठों के हाथों खेलना बसपा को भारी पड़ा। मौर्य ने हमलावर रुख में कहा था कि मायावती उन्हें गद्दार कह रही हैं, लेकिन असल में वे ही इस उपाधि की हकदार हैं। और मायावती को राजनीति करना अब मैं सिखाऊंगा। मौर्य ने मायावती को दलित की बेटी की जगह दौलत की बेटी भी कहा था।