विदेश मंत्री की पहल से पाकिस्तान से छूट कर आए मछुआरों में खुशी

फतेहपुर। पाकिस्तान की जेल की सलाखों से निकल कर करीब एक साल बाद वतन वापस लौटे सुजानपुर गांव के मछुआरों को लेकर समूचे गांव में खुशी का माहौल है। तीनों मछुआरों समेत उनके परिजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज को धन्यवाद देते हुये कहते हैं कि उन्हें नया जीवन मिला। पाक की यातनाओं को याद करते हुये आज भी वह सहम उठते हैं। उनके आने की खुशी में परिजनों की आंखे छलक पड़ती रहीं। ऐसे लग रहा था मानो समूचा सुख उन्हें आज बरसों बाद मिला है।

मामला सुजानपुर गांव का है। यहां के रहने वाले तीन मछुआरा प्रमोद कुमार, जितेन्द्र और धनीराम गुजरात के ओखा में मछली पकड़ने का काम एक ठेकेदार के यहां किया करते थे। करीब साल भर पहले मछली पकड़ते समय इनकी आंख लग गयी जब नींद खुली तो यह बार्डर को पार करके पाकिस्तान की सीमा में पहुंच चुके थे। तीनो के अनुसार वहां उनके आसपास पाक की सेना घेरे मिली। पाक सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर करांची की लॉड्री जेल में कैद कर दिया…यहां इनके साथ लगातार सख्ती से पूछताछ करते समय मारपीट करते रहे…लगातार यातनाओं के साथ ही दो जून की रोटी भी शुरू में इन्हें नसीब नहीं होती थी। इनकी माने तो जो खाना खाने के लिये दिया जाता था, उसे कुत्ते तक नहीं खा सकते थे, लेकिन वक्त की मजबूरी और हालातों ने उन्हें वह भोजन करने पर मजबूर कर दिया था।

वापस वतन लौटने पर परिजनों के साथ-साथ ग्रामीणों ने भी खुशी का इजहार करते हुये भारत सरकार को धन्यवाद देने के साथ ही प्रधान मंत्री और विदेश मंत्री का विशेष रूप से आभार जता रहे हैं। इनके घर में दीवाली जैसा माहौल है। परिजन कहते हैं कि बेटों के पाक की जेल में जाने के बाद उनके घर कमाने वाला कोई नहीं रह गया था। अब उनकी आश जगी है कि बिगडी माली हालत फिर से सुधर जायेगी और उनके लाल उनकी परवरिश में पूरा योगदान करेगे। तीनों की मातायें कहती है कि जब से बेटे जेल गये थे तब से पेट तो भरते थे, लेकिन अन्दर खाना धंसता नहीं था। अब भूखे रह लेंगे, लेकिन बेटों को बाहर नहीं जाने देंगे।

– मुमताज़ अहमद इसरार