इन आरोपों के तहत दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा स्मृति ईरानी का डिग्री मामला

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का डिग्री केस अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। जिस पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड मांगा है। स्मृति डिग्री मामले की सुनवाई 13 सितंबर को होनी है। इससे पहले पटियाला कोर्ट ने इस मामले में 11 साल की देरी होने के कारण याचिका को खारिज कर दिया था। 18 अक्तूबर 2016 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शैक्षणिक योग्यता के बारे में कथित तौर पर गलत सूचना देने को लेकर पूर्व केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ दायर शिकायत को रद्द कर दिया था। इसमें स्मृति को बड़ी राहत मिली थी। क्योंकि उनकी शिक्षा को लेकर चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे पर कई बार सवाल उठाए गए थे।

बता दें कि कोर्ट ने स्मृति इरानी को इस मामले में ये कह कर समन भेजने से इंकार कर दिया था कि ज्यादा वक्त हो जाने के कारण असली दस्तावेज खो गए हैं और जो दस्तावेज मौजूद हैं वो समन भेजने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने इसमें शिकायतकर्ता की मंशा पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की शिकायत करने में 11 साल लग गए यानी जाहिर है कि मंत्री को परेशान करने की मंशा से शिकायत की गई।

स्मृति ईरानी पर ये आरोप लगाकर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि उन्होंने अपनी शिक्षा को लेकर हर बार अलग-अलग जानकारियां दी है। उनके खिलाफ यह शिकायत कोर्ट में फ्रीलांसर राइटर अहमर खान ने दायर की थी। खान का आरोप है कि स्मृति ने अलग-अलग जगह अपने शैक्षणिक ब्यौरे अलग-अलग दिए। पिछले दो चुनाव में चुनाव आयोग में शिक्षा को लेकर दिए हलफनामे आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। इनमें से एक शपथ पत्र में स्मृति ने खुद को बीकॉम बताया है तो दूसरे में बीए।

साथ ही स्मृति ने 2004 के लोकसभा चुनाव में दिए एफिडेविट में खुद को डीयू के स्कूल ऑफ कॉरेस्पांडेंस से 1996 बैच का बी.ए. ग्रैजुएट बताया था। इसके बाद 2011 में राज्यसभा में नोमिनेशन के लिए दिए गए एफिडेविट में उन्होंने खुद को डीयू के स्कूल ऑफ करेसपोंडेंस से बी.कॉम पार्ट-I किया बताया था। लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान अमेठी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए दाखिल अपने तीसरे एफिडेविट में ईरानी ने बताया कि डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से बी. कॉम पार्ट-I किया था।