घाघरा नदी बस्ती जनपद में हर साल भारी तबाही मचाती है

उत्तर प्रदेश। बस्ती जिले में घाघरा नदी हर साल बड़े पैमाने पर तबाही मचाती है। बाढ़ से बचाव के लिए हर साल करोड़ो रूपए भी खर्च किए जाते है, इसके बावजूद इस के हर साल बाढ़ से भारी नुकसान होता है। किसानों की हजारों बीघा फसल बाढ़ के पानी से तबाह हो जाती है । इस साल भी बाढ़ से निपटने की जिला प्रशासन की तैयारी अधूरी नजर आ रही है ।बस्ती जिले में घाघरा नदी से हर साल बडे़ पैमाने पर तबाही होती है। हजारों बीघा खड़ी फसल जल मग्न होने की वजह से बरबाद हो जाती है ।

हर साल बाढ़ से बचाव के लिए करोड़ों रूपए खर्च किया जाता है और हर साल करोड़ों रूपए पानी में बह जाते है। यह सिलसिला कई वर्षो से बदस्तूर चला आ रहा है । सरकारे बदलती रही लेकिन घाघरा नदी पर अब तक बांध नहीं टिक सका है। हर साल करोड़ों खर्च करके बांध की मरम्मत कराई जाती है। करोड़ों के बोल्डर नदी में डाले जाते हैं और बाढ़ आने पर बोल्डर नदी में बह जाते हैं। यही सिलसिला वर्षो से चला आ रहा है,बांध की मरम्मत के नाम पर जितना पैसा खर्च किया गया उतने में शायद पक्का बांध बन जाता । इस साल भी बाढ़ से निपटने की तैयारी की जा रही है, लेकिन बाढ़ की तैयारी अब भी अधूरी नजर आ रही है । जिस तेजी के साथ बाढ़ से बचाव का काम होना चाहिए था उस तेजी से अब तक काम पूरी नहीं हो सका है । जबकि 15 जून तक बाढ़ से निपटने की तैयारी पूरी करने का समय सुनिश्चित किया गया था।

विक्रमजोत ब्लॉक के दर्जनों गांव में अब भी बांध का निर्माण नहीं हुआ है । बाढ़ आने पर कल्यानपुर,बाघानाला,गौरिया नयन, पारा समेत दर्जनों गांव पर हर साल बांध टूटने का खतरा बना रहता हैं । हर साल लोगों को घर छोड़ कर दूसरे ठिकाने पर शरण लेनी पड़ती है। बावजूद इसके इन गांवों में आज तक बांध का निर्माण नहीं कराया गया है। नदी लगातार अपनी दिशा बदल रही है। नदी के दिशा बदलने से दर्जनों गांवो पर इस साल खतरा मण्डरा रहा है। गांव वालों ने इस के लिए तहसील पर प्रदर्शन भी किया । जिले के आलाधिकारियों को भी अवगत कराया गया लेकिन बाढ़ से बचाने के लिए अब तक जिला प्रशासन ने इन गांवो में कोई काम नहीं कराया है । कल्यानपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय तक नदी की कटान पहुंच चुकी है । जिस तरह से नदी कटान कर अपनी दिशा बदल रही है, इस साल बाढ़ आने पर स्कूल को न बचा पाने की आशंका जताई जा रही है । इस के अलावा गांव पर भी खतरा मण्डरा रहा है,अगर बाढ़ ज्यादा आई तो दर्जनों गांव नदी में विलीन हो जाएंगे । वहीं जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि 15 जून तक बंधों की मरम्मत के सारे काम पूरे किए जा चुके हैं, घाघरा और कुआनो नदी मिला कर 140 किलोमीटर बंधा नदी पर पड़ता है, जिसके रैन कट को भर दिया गया है । जिन गांवों पर बाढ़ का खतरा है वहां पर सुरक्षात्मक काम कर लिए गए हैं । हर साल की तरह इस साल भी जिला प्रशासन बाढ़ से निपटने की तैयारी का पूरा दावा कर रहा है, लेकिन जिस तरह से कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मण्डरा रहा है, वह जिला प्रशासन के दावों की हकीकत बता रहा है ।