सरसों के 40 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान : कृषि मंत्री

जयपुर। कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने विधानसभा में बतप्रदेश में इस बार सरसों के 40 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रदेश में 27 से 30 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई है और इस बार सरसों की उत्पादकता 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जो औसतन 13 से 14 क्विंटल प्रति हेक्टयर रहती थी।

डॉ. सैनी गुरुवार को प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश की मंडियों में सरसों की आवक शुरू हो गई है और फेयर एवरेज क्वालिटी की सरसों का भाव प्रति क्विंटल 3500 से 3700 रुपये चल रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा सरसों का 3600 रुपये समर्थन मूल्य घोषित किया गया है और इस पर 100 रूपये बोनस के रूप में दिए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि न्यूतनम समर्थन मूल्य पर राज्य में क्रय केन्द्र खोलकर 1 अप्रेलए 2017 से सरसों की खरीद शुरू हो जाएगी। कृषि मंत्री डॉ. सैनी ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य भारत सरकार द्वारा घोषित किया जाता है, राज्य सरकार द्वारा किसी भी तरह के समर्थन मूल्य का निर्धारण नहीं किया जाता है।

उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गेहूं पर बोनस नहीं देने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 3800 रुपये और उस पर 200 रुपये बोनस निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि मंडियों में अभी चने के भाव न्यूतनम समर्थन मूल्य से ज्यादा हैं, इसलिए चने की खरीद शुरू नहीं गई है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि चने की भी खरीद जल्द शुरू की जाएगी। डॉ. सैनी ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत यह प्रावधान है कि फसल कटाई के 14 दिन बाद तक अगर वह ओलावृष्टि या अतिवृष्टि से खराब हो जाती है, तो मुआवजे का प्रावधान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यापारी को किसी भी तरह की गुणवत्ता वाले जिंस की खरीद के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

कृषि मंत्री डॉ. सैनी ने कहा कि सब्जियों के भावों में उतार चढ़ाव आते रहते हैं, किसानों को औने-पौने दामों पर सब्जियां न बेचनी पड़े इसलिए इसमें संविदा खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही राजस्थान कृषि प्रसंस्करण एवं प्रोत्साहन नीति 2015 के तहत सब्जी आधारित प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने पर विभिन्न प्रकार की रियायतें भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे पहले विधायक कैलाश चौधरी के मूल जवाब में कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार का यही प्रयास रहता है कि किसानों को उनकी उपज का समुचित मूल्य प्राप्त हो।

उन्होंने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिश पर भारत सरकार द्वारा किया जाता है। वर्तमान में खरीफ फसलों में धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द, कपास, तिल, अरहर, मूंगफली, सूरजमुखी बीज, नाइजर बीज तथा रबी फसलों के लिए गेहूं, जौं, चना, सरसों, मसूर, कुसुम और वाणिज्यिक फसलों में जूट, गन्ना, नारियल आदि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण प्रति वर्ष भारत सरकार द्वारा तय किया जाता है।