कोर्ट कर्मचारी ने किया अदालत का अपहरण

नई दिल्ली। आज तक आपने सिर्फ कोर्ट में अपहारण चोरी डकैती जैसे मामले सुने होंगे लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि किसी कोर्ट कर्मचारी ने अदालत का अपहरण कर लिया हो। और अगर आपने नहीं सुना तो हम आपको ऐसे ही मामले के बारे में बताते हैं। दिल्ली के तीस हजार कोर्ट परिसर में भ्रष्टाचार के मामलों की एक विशेषष अदालत में पिछले हफ्ते यह वाकया हुआ। कोर्ट में कोलकाता से सीबीआई के एक गवाह की लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग चल रही थी, तभी कोर्ट की एक स्टेनोग्राफर (आशु लिपिक) अचानक उठी और रूम छोड़ते हुए बोली, ‘जा रही हूं, मेरी कैब बाहर इंतजार कर रही है। उसका ये रवैया देखकर जज भी चौक गए। रोकने टोकने के बाद भी वो नहीं रूकी और चली गई। आखिर कार दूसरे स्टेनो को बुलाया गया। इस कारम करीब 5-10 मिनट कार्यवाही ठप रही।

बता दें कि महिला के व्य़वहार पर आहात कोर्ट के जज ने कहा कि ये हरकत अदालत का अपमान है। जिससे कोर्ट के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। ये कोर्ट के लिए बहुत ही अप्रिय स्थिति है। महिला कर्मी ने कई वकीलों की मौजूदगी में लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को हाईजैक किया। इससे वहां मौजूद लोगों के बीच अदालत की छवि खराब हुई।
कोर्ट के काम में बाधा डाली जज ने स्टेनोग्राफर के कृत्य का अपने लिखित आदेश में विस्तृत ब्योरा देते हुए कहा कि स्टाफ ने कोर्ट कार्यवाही में बाधा डाली। पीठासीन अधिकारी और वकीलों को दूसरे स्टेनो का इंतजाम होने तक करीब 5-10 मिनट रुकना प़़डा।

वहीं इसके बाद कोर्ट ने अधीक्षक घटना के बारे में सूचित किया। कोर्ट का काम दोबारा तब फिर शुरू हुआ जब वॉकर की मदद से फ्रेक्चर पैर के साथ नियमित स्टेनो रूम में पहुंचा। कार्रवाई का फैसला जिला जज पर छोड़ा जज ने अपने आदेश में कहा है कि वह महिला स्टेनो के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई कर सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं करके मामले को केवल जिला जज के समक्ष भेजा जा रहा है।