शर्मनाक: लाइलाज बिमारी से झूझती मां को बेटे ने जंजीरों से बांधा, खाने को नहीं देता खाना

मेरठ। मां अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं करती खुद भूखी रहकर अपने बच्चों को खाना परोसती है, लेकिन वहीं बच्चें बुढ़ापे में अपनी मां को दुत्कार देते हैं। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आया है , जहां एक लाइलाज बिमारी से झूझ रही बुढ़ी मां को उसके बेटे और बहु ने जंजीरों से बांध दिया। बुजुर्ग महिला कई महिनों से यूहीं जंजीरों से बंधी हुई घर के बाहर खड़े एक ऑटों में अपनी जीवन लीला समाप्त होने की कामना कर रही है। बुजुर्ग महिला कि इस हालत को देखकर हर किसी को रोना आ जाए लेकिन उसके बेटे-बहु को अपनी मां की हालत पर रोना तो दूर तरस तक नहीं आया। इस मामले के जारी रहने के चलते आस-पड़ोस को लोगों ने पुलिस में बेटा-बहु के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी।

शिकायत के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जब बुजुर्ग महिला की बहु से पूछा तो उसने कहा कि उसकी सास मनोरोगी है, लेकिन लोग सवाल उठ रहे हैं कि इस तरह किसी को बेड़ियों में जकड़कर रखना गुनाह है और पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। मामला मेरठ के कांशीराम आवासीय कॉलोनी का है, जहां 90 वर्षिय अवरी बेगम को उसके बेटे और बहु दुत्कार दिया और घर के बाहर खड़े एक ऑटो में उसे जंजीरों से बांध दिया। आसपास के लोगों ने बताया कि उनके बहू बेटा पहले तो अवरी की देखभाल करते थे, लेकिन  पिछले पांच महीने से लाइलाज बीमारी का शिकार होने के बाद उन्होंने खाट पकड़ ली। तभी से बहू बेटे ने उन्हें जंजीरों में जकड़ दिया।

लोगों ने बताया कि बेटा बहू दोनों कई महीने से वृद्धा को प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्हें खाने के लिए रोटी भी नहीं दी जाती और रात 12 बजे तक उन्हें एक टेम्पो में बांधकर रखा जाता है। लोगों ने बताया कि कई बार विरोध किया तो बेटा बहू ने वृद्धा को मानसिक विक्षिप्त बता दिया।लोगों ने बताया कि अवरी बेगम के पति किसी सरकारी विभाग में कार्यरत थे। दस हजार रुपये पेंशन के भी आते हैं, फिर भी अवरी को ऐसे दिन देखने पड़ रहे हैं। उधर, खरखौदा पुलिस सूचना पर मौके पर पहुंची और बेटा-बहू को नसीहत देकर वृद्धा को उसके हाल पर छोड़कर वापस लौट आई। पुलिस का कहना है कि वृद्धा का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है।