चुनाव आयोग के आदेश का उलटा मतलब न निकाला जाए: सौरभ भारद्वाज

नई दिल्ली। संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर निर्वाचन आयोग में आम आदमी पार्टी (आप) की दलील खारिज हो जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आप ने कहा कि चुनाव आयोग के आदेश का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। इस संबंध में आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति के आदेश को रद्द घोषित कर दिया था। इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट के अनुसार इस विषय के सम्बंध में याचिका पर सुनवाई का कोई सवाल ही नहीं बनता है।

हालांकि चुनाव आयोग ने आदेश दिया है कि वह अभी इस याचिका पर सुनवाई करेगा। लिहाजा चुनाव आयोग के इस आदेश को चुनौती देने के लिए सभी उपाय उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि हम उच्च न्यायालय के साथ ही चुनाव आयोग के आदेशों का भी सम्मान करते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं निकाला जाए कि चुनाव आयोग के आदेश से आप सदस्यों की सदस्यता समाप्त हो गई है। 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए इस मामले में उसकी दलील को खारिज कर दिया है।

बता दें कि अभी इसपर आयोग का फैसला नहीं आया है लेकिन आयोग ने आप के तर्कों को सिरे से नकार दिया है। दरअसल, पूरा मामला 13 मार्च, 2015 का है जब आप ने अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। 19 जून 2015 को प्रशांत पटेल नाम के एक वकील ने राष्ट्रपति के पास आप के इन 21 संसदीय सचिवों की सदस्यता रद्द करने के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद केजरीवाल कैबिनेट ने आनन-फानन में संसदीय सचिवों के पद को लाभ के दायरे से बाहर करने का प्रस्ताव पास किया। इससे पहले मई 2015 में चुनाव आयोग के पास एक जनहित याचिका भी डाली गई थी। जनहित याचिका को आधार बनाकर चुनाव आयोग ने 21 विधायकों को मार्च 2016 में नोटिस देकर एक-एक करके बुलाने का फैसला लिया था।

गौरतलब है कि इससे पहले मई 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आप सरकार को ऐसा ही एक नोटिस भेजा था। 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से नियुक्तियों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। उधर संसदीय सचिवों की नियुक्तियों का कांग्रेस और भाजपा भी विरोध करती रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा आपको नोटिस जारी किए जाने के बाद आप पर विपक्ष के हमले और तेज हो गये थे। आयोग के इस रुख के बाद यह माना जा रहा है कि भाजपा और विपक्ष एक बार फिर आप पर दबाव बनाएंगी।