ई-कॉमर्स : धोखाधड़ी से हो जाएं सावधान !

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में अमेरिका के एक नागरिक से डेल लैपटॉप चोरी होने के मामले में चल रही जांच पड़ताल के लिए अनुपम सिन्हा (बदला हुआ नाम) से संपर्क किया। अनुपम लैपटॉप पुराने उपयोग किए गए सामान खरीदने और बेचने वाले भारत के एक सुप्रसिद्ध ऑनलाइन पोर्टल से खरीदा था। उनके पास भुगतान की रसीद थी और तकनीकी सुरागों ने उस धोखेबाज विक्रेता तक पहुंचा भी दिया। इससे सिन्हा सुरक्षित हो गए, हालांकि वह हड़बड़ा गए थे।

E_commerce

यह ई-कॉमर्स पोर्टल के साथ बढ़ती हुई समस्या है। खासतौर पर पुराने उपयोग किए गए सामनों के ई-मार्केट प्लेटफार्मो पर, जहां से खरीदार अनजाने में चोरी की गई वस्तुएं खरीद रहे हैं। हाल ही में पूरे भारत में लगभग 172 ऐसे मामले दर्ज कराए गए हैं और यह संख्या हर महीने बढ़ रही है। यहां तक कि नए नकली उत्पाद भी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों पर बेचे जा रहे हैं।

विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश के निवासी दुर्गा प्रसाद ने हाल ही में एक अग्रणी ई-कॉमर्स पोर्टल पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। उन्होंने लेनोवो का एक लैपटॉप खरीदा, जिसने 27 दिन बाद ही काम करना बंद कर दिया। जब ई-कॉमर्स वेबसाइट से संपर्क किया गया, तो प्रसाद को उत्पादक से वारंटी का दावा करने के लिए कहा गया। उन्हें आगे यह जानकर काफी निराशा हुई कि भारत के एक अग्रणी ई-कॉमर्स पोर्टल पर एक अनाधिकृत विक्रेता द्वारा वह लैपटॉप बेचा गया।

वर्ष 2015 में 32 साल के आईटी व्यवसायी के विरुद्ध चोरी के लैपटॉप बेचने का मामला पंजीकृत किया गया। वह लैपटॉप चुराता था और उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर बेच देता था। उसे बाद में कोयम्बटूर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया।

वर्ष 2013 में गुड़गांव में भी ऐसी ही घटना हुई, जहां पर चोरों के एक समूह ने ओएलएक्स पर बेहद कम कीमत पर चोरी की गई वस्तुओं को अपलोड कर दिया था। बाद में पाया गया कि उस विक्रेता के विरुद्ध चोरी के लगभग 60 मामले दर्ज थे। ऑनलाइन सामग्री खरीदने की यह स्थिति जटिल होती जा रही है, क्योंकि लोग इसके आसपास विचार करने वाले नियमों के जटिल सेट को समझने में असफल होते हैं। लेक्सकॉम्प्लाई डॉट कॉम के संस्थापक और कारपोरेट कानूनों के विशेषज्ञ गौरव जैन बताते हैं, “उत्पादों की नकली समीक्षाओं के साथ पूरी जानकारी की कमी के कारण उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी के मामले काफी बढ़ गए हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत में पुराने प्रयोग किए गए उत्पादों के बाजार में तेजी से आई वृद्धि का मूल्यांकन करने और निरीक्षण करने की जरूरत है, क्योंकि इसके आसपास अनुपालन और विनियमों को उचित तौर पर पारिभाषित नहीं किया गया है और ये कोई धोखाधड़ी होने पर खरीदार को किसी भी कानूनी कार्यवाही को जीतने से रोकते हैं। गौरव जैन बताते हैं, “ग्राहकों और ई-कॉमर्स पोर्टल को कानूनी दिक्कतों से बचाने के लिए लेन-देन के अनुरूप अभ्यासों को और बेहतर करने की जरूरत है। उचित अनुपालन की कमी के कारण ऑनलाइन खरीदार अनजाने में विक्रेताओं को उनके प्लेटफार्म का प्रयोग करने का अनुचित लाभ दे रहे हैं। इस तरह सच्चे और निर्दोष खरीदार को धोखा दिया जाता है।”

जैन ने कहा, “उदाहरण के लिए, पोर्टल द्वारा जारी ‘भुगतान रसीद’ कोई बिल नहीं है और इसलिए, टैक्स फाइल करते समय या कुछ विशेष स्थिति में, वारंटी का दावा करते हुए इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता है। विक्रेता से बिल प्राप्त करना ग्राहक का अधिकार है, लेकिन दुर्भाग्य से उपभोक्ता पोर्टल से भुगतान रसीद और मेमो स्वीकार करने के आदी हैं। वे इनसे होटलों जैसे सेवा प्रदाताओं से मिलने वाले इनवॉइस की अपेक्षा नहीं रखते।”

उन्होंने कहा कि उपभोक्ता असल बिल से अनजान होते हैं, जिसका प्रयोग जरूरत पड़ने पर वारंटी का दावा करने के लिए किया जा सकता है। गौरव जैन ने कहा, “ऑनलाइन खरीदार कई बार उन कानूनी दिक्कतों के बारे में अनजान होते हैं जिनका सामना उन्हें किसी अनैतिक/बेईमानी के मामले की स्थिति में करना पड़ सकता है।”

उन्होंने कहा कि ऑनलाइन विक्रेता कोई घोषणापत्र नहीं देते, जो खरीदारों को यह सुनिश्चित करने में मदद करे कि बेचा गया सामान चोरी का नहीं है या इसे किसी गैरकानूनी तरीके से प्राप्त नहीं किया गया है।