ड्रीम प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी की कमान अब डॉ आशीष श्रीवास्तव के हाथ में

देहरादून। सूबे में स्मार्ट सिटी की क़वायद के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अब अपनी लोकप्रिय छवि और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाने वाले डॉ आशीष श्रीवास्तव को नई ज़िम्मेदारी सौंपी है। जिसके तहत इनको स्मार्ट सिटी का अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी बनाया गया है।डा श्रीवास्तव ने अपनी सेवाओं और काम के बल पर जिले के लोगों में काफी लोकप्रियता हासिल की है। हमेशा  अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने वाले आशीष श्रीवास्तव को उनके काम के प्रति संकल्पित देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी दी है। इसके पहले त्रिवेंद्र रावत सरकार ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की भी ज़िम्मेदारी दे रखी है। इसके ही इनके पास सीएम के अपर सचिव की भी जिम्मेदारी है।अब  स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अतिरिक्त मुख्य कार्याकारी अधिकारी की जिम्मेदारी भी सौंप दी है।

डॉ आशीष श्रीवास्तव की बात करें तो इन्होंने सरकार द्वारा दी गई सभी जिम्मेदारियों का पालन बड़ी ही बखूबी से किया है, फिर चाहे वो उत्तरकाशी के डीएम का पद हो या फिर मुख्यमंत्री के अपर सचिव का, जिसका पालन वो इस समय भी बड़ी बखूबी से कर रहे हैं। आपको बता दें कि गांधी जयंती के अवसर पर उनके काम के प्रति दृढ़ संकल्पता को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सूबे के राज्यपाल डॉ कृष्ण कान्त रावत ने सम्मान पत्र देकर सम्मानित भी किया था। उन्हें ये सम्मान इसलिए मिला था क्योंकि उन्होंने स्वस्छ भारत अभियान के तहत नगरपालिका क्षेत्र उत्तरकाशी को साफ सुथरा रखने के लिए  ”मोबाइल लक्की ड्रा अभियान” की शुरुआत की थी।

इनके काम के प्रति दृढ़ संकल्पता की बात करें तो उन्होंने जब 27 अक्टूबर को एमडीडीए के उपाध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था तो उन्होंने पहले ही दिन सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को आदेश देते हुए कहा था कि पत्रावलियों पर तुरंत सकरात्मक तरीके से निर्णय लिया जाए और सभी अधिकारियों को लंबित पत्रावालियों की सूची बनाने और उनके निस्तारण हेतु समय सीमा निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए थे, इसी के साथ उन्होंने प्राधिकरण में सहायता केंद्र स्थापित करने के भी निर्देश दिए थे। इसी के साथ उन्होंने कहा था कि हम सभी जनता के नौकर हैं। हमारा व्यवहार और आचरण यथावत होना चाहिए ताकि आम आदमी को अपना कोई भी काम कराने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

 अजस्र पीयूष