क्या आप जानते हैं पूजा की माला में 108 ही मोती होने का रहस्य

नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं की किसी भी मंत्र का 108 बार ही जाप क्यों किया जाता है, या किसी भी माला में 108 दाने ही क्यों होते है। अगर आप इस का कारण नहीं जानते या रहस्य नहीं जानते तो चलिए आपको बताते हैं की ऐसा क्यों है।

ज्योतिषो के मुताबिक, ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन भागो को मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृक्ष्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन के नाम से जाना जाता है। इनकों हम लोग राशिया भी कहते हैं। इन राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु भी शामिल होते हैं। तो अगर आप 9 ग्रहों की संख्या यानी 9 को 12 राशियों की संख्या से गुणा करेगें तो आपका जवाब 108 आएगा। साथ ही कुल 27 नक्षत्र होते है। एक नक्षत्र के 4 चरण होते है, तो कुल 27 नक्षत्रो के 105 चरण हुए। माला का हर एक दाना नक्षत्र के एक-एक चरण को बताता है। इसी वजह से माला में 108 मोती या दाने होते हैं।

ये माला तुलससी, वैजयंती, रुद्राक्ष, कमल गट्टे, स्फटिक, पुत्रजीवा, अकीक, रत्नादि में से किसी की भी हो सकती है। अलग-अलग कार्य के अनुसार इन मालाओं का चयन किया जाता है।

अगर आप तारक मंत्र का जाप करते हैं तो उसके लिए सर्वश्रेष्ठ माला तुलसी ती मानी जाती है। माला में मौजूद 108 मनके दिल में मौजूद 108 नाड़ियों की तरह है। माला में मौजूद 109वा मनका सुमेरु कहलाता है। कोई भी क्यक्ति जो जाप कर रहा हो उसको 108 मनके पूरे करने चाहिए और इसके बाद सुमेरु से माला को पलट कर फिर से जाप शुरु करना चाहिए।

आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की किसी भी स्थिति में माला का सुमेरु ना लांघे। जाप करते समय आपको माला को अंगूठे और अनामिका से दबाकर रखना चाहिए और मध्यमा उंगली से एक मंत्र जप लेने के बाद एक दाना हथेली के अंदर खींच लेना चाहिए।

जप करते समय आपको हमेशा इस तरह से बैठना चाहिए की आपकी गर्दन और सिर एक सीधी रेखा में रहे। मंत्र जप पूरा कर लेने के बाद आपको सुमेरु को माथे पर छुआ कर माला को किसी पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए।