डीएम की पत्नी ने दिखाई दरियादिली

हरदोई। पहाड़ो पर बर्फ़बारी के बीच यूपी में कड़ाके की शीत लहर में हरदोई जिले का न्यूनतम तापमान पांच डिग्री के आसपास हो ऐसे में खुले आसमान के नीचे जिलाधिकारी आवास से कुछ कदम की दूरी पर एक महिला अपने दो छोटे बच्चो के साथ पिछले दो दिन से रात दिन रह रही थी। कड़कड़ाते जाड़े की रात एक बेबस महिला और उसके दोनों बच्चो के खुले आसमान के नीचे सड़क पर रहने की सूचना किसी ने जिलाधिकारी की पत्नी को दे दी। सूचना मिलने के बाद जिले के सबसे बड़े हाकिम की पत्नी भी दरियादिली दिखाते मौके पर पहुंची। उनके मौके पर पहुँचते ही प्रसाशनिक अफसरों की नींद भी खुल गयी। डीएम की पत्नी ने पहले अपनी रसोई से बच्चो को खाना खिलाया उसके बाद उनको रैनबसेरे भिजवाया।

आमतौर पर अफसर पत्नियों के कड़क मिजाज के चर्चे सुने जाते है लेकिन आज हरदोई में जिले के सबसे बड़े अधिकारी जिलाधिकारी की पत्नी का मानवीय चेहरा नजर आया। दरअसल कड़ाके की ठण्ड में जिलाधिकारी आवास के बाहर कुछ दूरी पर एक महिला अपने दो छोटे बच्चो के साथ खुले आसमान के नीचे लेटी थी। एक पेड़ की आड़ और पत्तो की छाया में लेटी इस बेबस महिला और बच्चों के बारे में जिलाधिकारी की पत्नी को किसी ने उनकी इस बेबसी की सूचना पहुंचा दी।

डीएम की पत्नी को रात करीब साढ़े दस बजे जैसे ही इस महिला के बारे में सूचना मिली वो तुरंत अपने आवास से बाहर निकल कर महिला के पास पहुँच गयी। उनके पीछे पीछे डीएम विवेक वाष्णेय भी मौके पर पहुँच गए। जब दोनों ने महिला और उसके बच्चों का हाल देखा तो हैरान रह गए। डीएम दम्पति के मौके पर पहुँचते ही सरकारी अमला भी ठंड से निकल कर मौके पर पहुँच गया। पहले तो बच्चो और महिला को कम्बल ओढाया। उसके बाद डीएम की पत्नी ने अपनी रसोई से बच्चो और महिला के लिए खाना मंगा कर खिलाया उसके बाद बच्चों को आपने हाथो से दूध पिलाकर उनको रैन बसेरे में भिजवाया।

महिला कोतवाली देहात के मेंडू पुरवा के रहने वाली बटेश्वर पत्नी है पहले यह शहर में रहकर घरो में काम वगैरह करती थी। लेकिन कुछ दिन पहले परिवार जहां रहता था वहा उनको अपना आशियाना छोड़ना पड़ा कुछ दिन सड़क पर रहने के बाद पूरा परिवार गांव चला गया लेकिन गांव में बना मकान गिरा होने के कारण वहा भी खुले में रहने और कोई काम ना होने से महिला काम और आशियाने की तलाश में अपने दो छोटे बच्चो के साथ दो दिन पहले गांव से शहर आ गयी लेकिन कोई काम ना मिलने और सर छिपाने के लिए कोई आशियाना ना मिलने के कारण जिलाधिकारी आवास के बाहर एक कोने में पेड़ की आड़ और पत्तो की छाया को अपना आशियाना बनायीं थी। ऐसे कड़कड़ाते जानलेवा जाड़े में अफसर पत्नी के मानवीय चेहरे से फिलहाल फौरी तौर पर महिला और उसके बच्चो को कुछ राहत मिल गयी।

आशीष सिंह, संवाददाता