धनतेरस पर क्यों होती है बर्तनों और अनाज की पूजा

नई दिल्ली।  दीपावली का त्योहार पांच दिन का होता है और इन पांच दिनों में हर दिन अलग-अलग परम्पराए निभाई जाती है। उन्हीं में से एक परम्परा है बर्तनों की पूजा,जोकि धनतेरस के दिन की जाती है। शास्त्रों के अनुसार जब समुंद्र मंथन हुआ तो उसमें से 14 चीजों का जन्म हुआ। जिनमें से एक थे धनवंतरी देव। धनवंतरी देवता के जन्म के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। शास्त्रो के मुताबिक धनवंतरी देव देवाताओं के चिकित्सकों के देव हैं। यहीं वजह है कि इस दिन देश में जगह-जगह पर चिकित्सा से जुड़ी बड़ी-बड़ी योजनाओं की शुरुआत की जाती है।

इस दिन धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन लोग अपने घर में लक्ष्मी जी का आगमन कराने के लिए उनकी पूजा करते हैं। वैभव की इच्छा जो लोग करते हैं वह घर में तरह तरह की चीजें लेकर आते हैं। लोग अपने घरों में हीरा, चांदी, धनिया का बीज, पत्नी के लिए लाल कपड़ा, तिजोरी या फिर स्टील के बर्तन अपने घरों में लाते हैं। लेकिन धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन धातु की कोई वस्तु खरीदनी चाहिए, क्योंकि वो धातु एक शुभ संकेत होता है। बताया जाता है कि जब समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी का जन्म हुआ तो उनके हाथ में अमृत का कलश था, इसिलए इस दिन बर्तनों को खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन कई लोग बर्तनों को खरीदकर उनकी पूजा करते हैं, ताकि जब वे बर्तन को घर में इस्तेमाल करें तो घर में सुख-समृद्धी का वास रहे। बर्तनों के अलावा धनतेरस पर चांदी खरीदना भी शुभ माना जाता है, लेकिन बर्तनों की पूजा करना एक परम्परा बन गई है। देश के कई हिस्सों में धनतेरस के दिन बर्तनों की पूजा करना शुभ माना जाता है।

दीपावली पर अनाज का पूजन

दीपावली पर धान की खेती को काटा जाता है। इसिलए इस दिन धान का बहुत महत्व है। धान के रुप में जहां शहरों में पूजा के दौरान खील का उपयोग किया जाता है तो वहीं देश के गांवों में धान की कटाई होती है और रात के समय धान को मां लक्ष्मी को अर्पित किया जाता है जिसके बाद उसकी पूजा की जाती है। दिवाली के दिन सात  तरह के अनाज मां लक्ष्मी को अर्पित करने की परंपरा है जिसमें गेहूं, चावल, मुंग चना, जौ, उडद, मसूर शामिल हैं। इन सात अनाजों के साथ पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदेव बनी रही है।