बेटियों, पौत्री व नतनियों ने दिया कंधा, नम हुई सबकी आंखे

पटना। बेटियां कभी भी बेटों से कम नहीं होती है, इस बात को गया के इमामगंज में रहने वाली लड़कियों ने साबित कर दिया। यहां के एक शिक्षक की बेटियों ने अपने पिता की। अर्थी को कंधा देकर समाजिकता की एक नई मिसाल कायम की। रिटायर्ड शिक्षक रामबालक प्रसाद की दिल की धड़कन रुकने से उनका निधन हो गया

 

इसके बाद उनकी बड़ी बेटी कुमारी विद्यावती सिन्हा, रेणू सिन्हा, नतिनी रीनम सहित पौत्री ने अर्थी को कंधा देकर मोरहर नदी किनारे अंतिम विदाई दी। उनके बड़े बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। इस क्षेत्र में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी को उसके परिवार की बेटियों ने कंधा दिया हो। इस घटना ना सिर्फ समाज का मिथक तोड़ा है बल्कि समाज में मिसाल भी कायम की है। इस शव-यात्रा में ना सिर्फ उनकी बेटियां बल्की उनकी पौत्री और नतिनियों ने भी साथ दिया।

इसे देखकर वहां मौजुद सभी लोगों की आंखे भर आईं। उनके अंतिम संस्कार में सभी राजनीतिक पार्टी के नेता, समाजसेवक, शिक्षक आदि सैकड़ो लोग मौजूद थे। सभी ने नम आंखों से विदाई दी।