मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीण, कॉलोनी बनाने में धांधली

फतेहपुर। केंद्र सरकार ने गरीबों के लिये आवासी योजनाए भले ही चलाई हो मगर गांव से लेकर शहर तक कितने पात्र हैं, जिनको सरकार की इस योजनाओ का लाभ नहीं मिल पा रहा हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार आज भी ऐसे हैं जिन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले में देखने को मिला जहा पर प्रधान ने कालोनियों को अपने चहेतो ठेकेदार से बनवाया और वह ग्रामीणों के कालोनियों का पैसा लेकर रफूचक्कर हो गया।

उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के हुसैन गंज विधान सभा क्षेत्र भिटौरा ब्लॉक का लोहिया गाँव खड़कपुर जिसकी तस्वीरो को देख कर आप अंदाजा लगा सकते हैं।कालोनी के नाम पर इन भोले भाले ग्रामीणों को किस तरह ठगा गया हैं। कहने को तो प्रधान ने इन ग्रामीणों को कालोनिया मुहैय्या कराई मगर अभी तक इनकी कालोनियों में छत नहीं पड़ी। ग्राम प्रधान ने इन कालोनियों को बांदा जिले के ठेकेदार के द्वारा निर्माण कराया। वही यह ग्रामीण आज भी छत न होने के कारण चिंतित हैं की आने वाली बारिश में हम कहा जायगे। मगर इस सब का असर प्रधान के ऊपर पड़ता नज़र नहीं आ रहा हैं।

ग्रामीणों से प्रधान ने ठेकेदार को निर्माण के नाम पर भारी रकम दिलवा दिया। यह कह कर की यही ठेकेदार तुम्हारी कालोनियों का निर्माण करायगे। भोले भाले ग्रामीण प्रधान की बातो में आ गए और उन्होंने ठेकेदार पर विश्वास करके अपनी कालोनियों की मिली रकम को दे दिया। ठेकेदार ने कालोनिया का निर्माण कार्यं तो कराया मगर कुछ दिन के बाद वह वहा से रफू चक्कर हो गया।

इस बारे में गाँव वालो ने जब प्रधान से बात की तो प्रधान यही कहता नज़र आया की बन जायगी धैर्य रखो। मगर आज चार पांच माह बीत जाने के बाद भी न तो इन कालोनियों में छत पड़ी और ना ही ठेकेदार नज़र आया। अब इनके पास पैसा भी नहीं यह लोग खुद निर्माण करा सके। क्योंकी इनका पैसा ठेकेदार लेकर नौ-दो ग्याराह हो गया।

यह बेचारे वक़्त के मारे कहा और किसके पास जाए। इनको तो अब चिंता खाये जा रही हैं की हमारी सुनसान दीवारों में छत कैसे पड़ेगी। इस गाँव में ऐसे लोग भी देखने को मिले जिनको प्रधान ने कालोनी नहीं दिया। वह बेचारे गांव किनारे कुटी बनाकर निवास कर रहे हैं। सरकार की आवासी योजना वह भी लोहिया गांव की बदहाली और लोगो की मूल भूत समस्या सरकारी दावों की पूल खोलते नज़र आ रहे हैं।

सब से बड़ी बात यह हैं की ग्रामीणों के लिए गांव में बरात शाला का निर्माण सरकारी धन खर्च कर के बनवाया गया। मगर उस बरात शाला की हालत यह हैं की उसमे कण्डे और भूसा भरा हुआ हैं। प्रधान को इतनी भी फुर्सत नहीं की बरात शाला को दुरुस्त करा ले जिससे की गाँव वाले अपनी बेटियों और बेटो की शादी वहा से कर सके। इस बारे में जब मीडिया ने प्रधान से बात करना चाहि तो उन्होंने फोन पर बाहर होने की बात। इस बारे में जब जिला पंचयात राज अधिकारी अजय कुमार से बात की गयी तो इन्होने अपनी लादी दुसरे विभाग के ऊपर ढरकाते हुए जांच कराने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया।

 मुमताज़ अहमद इसरार, संवाददाता