संसाधनों की कमी बन रही साइबर क्राइम को रोकने में बाधा

छपरा। जिले में साइबर क्राइम लगातार बढ़ रहा है लेकिन साइबर अपराधियों से निपटने में संसाधनों की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है। साइबर क्राइम कंट्रोल के लिए थानों में तकनीकी संसाधनों नहीं है। इस वजह से साइबर क्राइम के अनुसंधान में बाधा उत्पन्न हो रही है। साइबर क्राइम से जुड़े मामलों अनुसंधान के लिए जिले के सभी थाने जिला मुख्यालय के एक मात्र टेक्निकल सेल पर निर्भर हैं। नोट बंदी और डिजिटलीकरण के बाद से साइबर अपराध में काफी वृद्धि हुई है और इसकी संख्या राहजनी, लूट व छिनतई से कम नहीं है। कैशलेस, डिजिटलीकरण, ऑनलाइन मार्केटिंग, टिकट बुकिंग, हवाई यात्रा की टिकट बुकिंग, बिजली बिल का भुगतान, एक खाते से दूसरे खाते में राशि ट्रांसफर करने समेत अन्य सुविधाओं के शुरू होने के बाद लोग अब कैश लेकर नहीं चल रहे हैं और इसके लिए डेबिट कार्ड, एटीएम कार्ड, नेट बैंकिंग प्रणाली का प्रयोग कर रहे हैं । बदलते जमाने के साथ अपराधियों ने भी अपराध करने के तरीके बदल दिए हैं । अब वह भी गोली, बंदूक, चाकू का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, बल्कि शातिर अंदाज में लोगों के साथ धोखाधड़ी कर उनके खातों से रूपये उड़ा ले रहे हैं । इतना ही नहीं सरकारी कार्यालय के खाते से भी रूपये उड़ाने की कई चर्चित घटनाओं में पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

बता दें कि बैंकों के खाता धारकों से इन दिनों आधार कार्ड से लिंक कराने के नाम पर खुब ठगी की जा रही है और ठगी के शिकार खाता धारकों को प्राथमिकी दर्ज के लिए थाने का चक्कर लगाना पड़ रहा है । साइबर क्राइम के शिकार बैंकों के खाताधारक जब प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने में जाते हैं तो उन्हें साइबर थाना पटना जाने को कहा जाता है, हालांकि पीड़ित जब वरीय अधिकारियों से शिकायत करते हैं तो प्राथमिकी दर्ज की जाती है लेकिन अनुसंधान तथा कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ा रहता है ।

साथ ही जिले के किसी भी थाने में साइबर क्राइम के विशेषज्ञ नहीं हैं और साइबर क्राइम से जुड़े मामलों में अनुसंधान के लिए पुलिस के पास कोई संसाधन नहीं है । अपराधी भले आज हाईटेक हो गए हैं और साइबर क्राइम को हाईटेक तरीके से अंजाम दे रहे हैं लेकिन पुलिस आज 20 वीं सदी वाले तरीके से ही कार्य कर रही हैं । थानों में पुलिस कर्मियों, पुलिस पदाधिकारियों की कमी लंबे समय से बरकरार है । वाहनों की कमी, वाहनों के ईंधन की कमी और काम के अधिक बोझ के कारण भी अधिकांश सरकारी आदेशों का अनुपालन समय पर नहीं होता है । थानों में लगाए गए बीएसएनएल के लैंड लाइन फोन शहर को छोड़ कर देहाती क्षेत्रों में काम नहीं करता है।

वहीं पुलिस तथा थाने के आधुनिकीकरण के नाम पर एंड्रायड मोबाइल दिया गया है जिसका बैटरी बैकअप काफी कमजोर है और रैम कम रहने के कारण हमेशा मोबाइल सेट हैंग करता है । इससे भी अधिक परेशानी इस बात की है कि बीएसएनएल की मोबाइल का नेटवर्क फेल रहने के कारण पुलिस पदाधिकारियों से संपर्क करने के लिए उनके निजी नंबरो का इस्तेमाल करना पड़ता है । इंटरनेट सेवा की सुविधा बस मोबाइल पर ही है । अपराधियों का काल डिटेल्स निकालने, टावर लोकेशन पता करने, सिम कार्ड धारक का नाम तथा पता करने में कई दिन गुजर जाते हैं ।

इतना ही नहीं जिले के अमनौर थाना क्षेत्र के जोधौली बथना टोला गांव के हैदर अली से आधार कार्ड से खाते को लिंक करने के लिए नंबर पूछ कर लाखों रूपये की राशि गायब कर दिया गया । यह घटना 15 दिन पहले की है । इसके पहले मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कुलदीप नगर के रामचंद्र महतो से भी आधार कार्ड से खाते को लिंक करने के नाम पर 85 हजार की निकासी कर लिया गया । जब वे थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने गये तो साइबर क्राइम से जुड़ा मामला बताकर पटना साइबर थाना मे जाने को कहा गया । इस तरह की एक दो घटना प्रति दिन हो रही है । क्या कहते हैं अधिकारी सारण के पुलिस अधीक्षक अनसुइया रणसिंह साहू ने कहा कि साइबर क्राइम से जुड़े मामलों अनुसंधान के लिए पुलिस पदाधिकारियों को समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। जिले के सभी थाने को कम्प्यूटरीकृत करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है