चुनाव से पहले कांग्रेस ने लगाए सुखबीर पर आरोप

चंडीगढ़। पंजाब में विधानसभा चुनाव के कुछ समय पहले हुई नियुक्तियों पर कांग्रेस ने विरोध जताया है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के पहले इस प्रकार की नियुक्तियां राजनीतिक लाभ के लिए की गई हैं। बुधवार को प्रदेश कांग्रेस उप प्रधान व प्रवक्ता सुनील जाखड़ अपने निवास स्थान पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान इससे संबंधित दस्तावेज भी दिखाए। जिसके अनुसार एडिश्नल डायरेक्टर जनरल पुलिस इन्टेलीजैंस द्वारा 22 व्यक्तियों को इन्टेलीजैंस अस्सिटेंट पद पर कांस्टेबल रैंक में नियुक्ति देकर उनकी सीमा पट्टी क्षेत्र में पोस्टिंग के आर्डर भी हाथों-हाथ थमा दिये गये। इनमें से 21 नियुक्तियां उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के निर्वाचन क्षेत्र जलालाबाद में रहने वालों की हैं जबकि एक अबोहर उप मंडल का निवासी है। नियुक्ति का लाभ पाने वालों में, अरनीवाला नगर पंचायत के प्रधान सुखदेव सिंह अरनीवाला, शिअद अनुसूचित जाति विंग के प्रधान प्यारा सिंह व अरनीवाला सर्कल शिअद प्रधान निशान सिंह के अलावा शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य एवम् अबोहर से निकटवर्ती गांव बहाववाला के जत्थेदार कौर सिंह के बेटे शामिल हैं।


जाखड ने कहा कि पंजाब के इतिहास में अब तक हुई अनियमितताओं का रिकॉर्ड तोड़ते हुए गृह विभाग के मुखिया व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को चुनाव आचार संहिता लागू होने से कुछ समय पूर्व सरकारी नौकरियां, प्रशासकीय प्रक्रिया की धज्जियां उडाते हुए देने का जो इतिहास रचा है। उसके विरूद्ध चुनाव आयोग व राज्यपाल से गुहार लगाते हुए, ऐसे सभी राजनेतिक निर्णय तुरंत प्रभाव से रद्द करने की मांग की जायेगी।

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों की भर्ती के बहाने पंजाब सरकार ने साढ़े 6 लाख बेरोजगार युवकों व युवतियों से पैसे बटोरे, जबकि 7 हजार से कम पुलिस कर्मी भर्ती किये जाने थे। शेष प्रक्रिया तो अभी अधूरी पड़ी है। लेकिन 22 दिसंबर को राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिये उप मुख्यमंत्री ने पूरे पंजाब के युवाओं को नजरअंदाज करते हुए सीमावर्ती जिलों में नियुक्ति पत्र जारी कर दिये। सत्तारूढ़ अकाली दल से जुडे परिवारों से यह उम्मीद रखना व्यर्थ है कि वे सीमा क्षेत्र की अनुचित गतिविधियों पर नजर रख पायेंगे।