बोर्ड परीक्षाओं की तिथि पर असमंजस, चुनाव आयोग के समक्ष पेश होंगे अधिकारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परिक्षाओं की तिथि की घोषणा करने के बाद गुरूवार को देर रात इस फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए तिथि पर रोक लगा दी। चुनाव आयोग माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा बिना अनुमति के परीक्षा कार्यक्रम घोषित किए जाने से नाराज है। आयोग के साामने चर्चा पर सफाई देने के लिए बोर्ड अधिकारी शुक्रवार को अपना पक्ष सामने रखेंगे।

board

विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आयोग ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों को शुक्रवार को दिल्ली तलब किया है। साथ ही मुख्य सचिव राहुल भटनागर को पत्र लिखकर आपत्ति जताई। इसे प्रदेश में चुनाव की आहट भी माना जा रहा है। दरअसल, यूपी बोर्ड ने गुरुवार दोपहर बाद परीक्षा की तिथियों की घोषणा कर दी थी। यूपी बोर्ड की सचिव शैल यादव ने बोर्ड परीक्षा की तारीखों की घोषणा करते हुए बताया कि 10वीं की परीक्षा 16 फरवरी से 6 मार्च तक और इंटरमीडिएट की परीक्षा 16 फरवरी से 20 मार्च तक कराई जाएंगी। हाईस्कूल की परीक्षाएं 15 कार्य दिवसों और इंटर की परीक्षाएं 25 कार्य दिवसों में कराई जाएंगी। इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षाएं 22 दिसंबर से शुरू हो रही है।

इस घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने आपत्ति दर्ज की कि बिना आयोग की अनुमति के यूपी बोर्ड परीक्षा की तारीखें कैसे घोषित कर दी गई? चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा। सूत्रों का कहना है कि मुख्य सचिव ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी टी़ वेंकटेश को कार्यालय बुलाकर उनसे बातचीत की। सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को दिल्ली में होने वाली इस बैठक में चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी टी़ वेंकटेश, माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार व विभागीय निदेशक अमरनाथ वर्मा मौजूद रहेंगे।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार ने बताया कि अब बोर्ड परीक्षा की नई तारीखें शुक्रवार को चुनाव आयोग से विचार-विमर्श के बाद तय होंगी। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा कार्यक्रम रोकने की पुष्टि भी की।