‘आम आदमी को सिस्टम से जोड़ती है मदारी’

नई दिल्ली। अभिनेता इरफान खान किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उनकी हर फिल्में लीक से हटकर और जनमानस पर प्रभाव छोड़ने वाली होती हैं। इरफान ‘पीकू’ में अपने दमदार अभिनय के बाद फिल्म ‘मदारी’ से एक बार फिर दर्शकों के समक्ष कुछ नया पेश करने के लिए कमर कस चुके हैं।

Irfan Khan

‘मदारी’ स्टार ने आईएएनएस के साथ बातचीत में फिल्म की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा, “फिल्म में मदारी को एक अलंकार के रूप में दिखाया गया है, जिस तरह बचपन में हमने जमूरे और मदारी का तमाशा देखा है। यह फिल्म ठीक बिल्कुल वैसी ही है।”

यह मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत कहानी है, जो बचपन में देखे गए मदारी के खेल की तरह ही नचाने वाली है। इरफान ने बताया, “फिल्म में दिखाया गया है कि मदारी के खेल में जिस तरह मदारी, जमूरे को कंट्रोल करता है, उसी तरह हमारे देश का सिस्टम आम लोगों को कंट्रोल कर रहा है। यह आम लोगों और सिस्टम के संबंधों के ताने-बाने को पेश करती है।”

जैसा कि फिल्म के ट्रेलर में भी दिखाया गया है कि यह पिता-पुत्र के संबंध को बयां करती फिल्म है। ‘मदारी’ 22 जुलाई को रिलीज हो रही है। इसलिए इरफान फिल्म प्रचार के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। फिल्म के प्रचार के सिलसिले में इरफान ने लालू प्रसाद यादव से लेकर अरविंद केजरीवाल तक से मुलाकात की।

इरफान ने फिल्म के प्रचार के इस अनूठे तरीके पर कहा, “मैं इसे कोई नया तरीका ईजाद करना नहीं कहूंगा। फिल्म की पृष्ठभूमि में एक तरह से राजनीतिक टच है तो हमें लगा कि राजनीति से जुड़े लोगों से मिला जाए और उन तक आम लोगों की बातों को पहुंचाया जाए।”

वह आगे कहते हैं, “लालू जी से तो थोड़ी हल्की-फुल्की ही बातें हुईं, लेकिन अरविंद केजरीवाल से हुई मुलाकात काफी गंभीर थी और चर्चा में कई ज्वलंत मुद्दों को हमने उठाया।”

इरफान कहते हैं कि यह फिल्म पूरी तरहा से राजनीतिक ड्रामा नहीं है।

इरफान कहते हैं, “समय के साथ-साथ सिनेमा भी बदल गया है। पहले समानांतर फिल्मों का बोलबाला था। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) उस तरह की फिल्में बनाता था, लेकिन अब एनएफसीडी ने फंडिंग करनी बंद कर दी है। अब समय की मांग के हिसाब से फिल्में बन रही हैं, जिसमें कोई बुराई नहीं है।”

वह कहते हैं, “राजनीति और फिल्में कभी भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई नहीं होती। फिल्में सिर्फ माहौल बना सकती है। राजनीति से पूरा देश इफेक्ट होता है लेकिन फिल्में सिर्फ दो-ढाई घंटे तक ही असर छोड़ती है। राजनीति आपकी जिंदगी सुधार सकती है या एक नया आयाम दे सकती है।”

फिल्म में इरफान के लुक की काफी चर्चा है। इरफान कहते हैं, “फिल्म में मेरी कई वर्षो की यात्रा दिखाई गई है। जीवन के हर पड़ाव पर मेरा लुक बदल गया है और क्यों बदला है उसकी भी एक कहानी है, जो फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगी।”

(आईएएनएस)