फतेहपुर में युवक ने गेहूं से बनाया सिक्का

फतेहपुर में साहित्य क्षेत्र में राष्ट्रकवि सोहन लाल द्विवेदी से लेकर पत्रकारिता में नन्दन मासिक पत्रिका के सम्पादक प्रकाशक कन्हैया लाल नन्दन ने जिले को गौरव प्रदान किया है। नई पीढी ने भी नए प्रतिमान गढने की दिशा में कदम आगे बढाये हैं। अमौली क्षेत्र के सरांय धरमपुर गांव के शैलेन्द्र कुमार दो कुन्तल 11 किलोग्राम गेहूं के दानों से एक रूपये की भारतीय मुद्रा (सिक्का) का हूबहू प्रतिरूप बना कर अपनी कला के माध्यम से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के दावेदार बनकर उभरे हैं।

दो कुन्तल से भी ज्यादा वजन का एक रूपये का भारतीय सिक्का 5फुट उंचाई का है जिसे 2 कुन्तल 11 किलो गेहूं के दानों से बनाया गया है। महज 45 दिन में इसको बनाने वाला किसी शोध केन्द्र का शोधार्थी नहीं बल्कि एक साधारण किसान परिवार का युवक है। शैलेन्द्र का कहना है कि एक रुपये के सिक्के में गेहू की बाली देख कर उसे गेहूं के दानों से सिक्का बनाने की प्रेरणा मिली उसका मानना है कि देश में गेहूं नहीं होगा तो किसान खुशहाल नहीं होगा और उसने यह सिक्का बना डाला।

किसी भी देश की धातुई मुद्रा का गेहूं या अन्य किसी अनाज के दाने से बनाया गया इतना विशाल और अद्भुत प्रतिरूप शायद विश्व में पहली बार बना होगा तभी तो शैलेन्द्र अपनी इस कला को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराना चाहते हैं। बेटे की इस अनूठी कला से मां सीमा बेहद खुश है, मां चाहती है कि इस सिक्के को दुनिया देखे और उनके बेटे के साथ ही देश को भी सम्मान मिले। छोटे भाई पंकज की माने तो सिक्का बनाने की भाई की जिद और जुनून से वह पहले तो नाराज था लेकिन जब सिक्का तैयार हुआ तो उसके पास खुशी जाहिर करने के लिये शब्द नहीं हैं।