अपने गढ़ में नतमस्तक हुए चौधरी अजीत सिंह

बागपत। एक जमाना था जब बागपत में चौधरी परिवार को लोग सबकुछ मानते थे और एक आवाज पर बागपत की जनता नतमस्तक हो जाया करती थी लेकिन अब खुद चौधरी अजीत सिंह को राजनीती में अपना अस्तित्व अंधेरे में दिखने लगा है। लोकसभा चुनाव में करारी हार का मुह देखने के बाद अब अजीत सिंह विधानसभा चुनाव में अपनी जमीन तलाश कर रहे है और आज बागपत विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते वक्त छोटे चौधरी जनता के सामने नतमस्तक हो गए और प्रत्याशियों को जिताने के लिए वोट मांग रहे थे।

दरअसल बागपत जनपद को किसानों के मसीहा स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की कर्मभूमि है और राष्ट्रीय लोकदल का गढ़ भी माना जाता है आपको बता दे कि चौधरी चरण ने बागपत की छपरौली विधानसभा सीट से सबसे पहला चुनाव जीता था और देश के प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया था और किसान मशीहा कहा जाने लगा था और उसके बाद राजनीती में छोटे चौधरी अजीत सिंह ने कदम रखा और बागपत में सभी सीटों पर आरएलडी के ही प्रत्याशी जीता करते थे और लोकसभा भी आरएलडी के ही पाले में आती थी लेकिन 2012 विधानसभा चुनाव में तीन विधानसभा सीट बागपत, बड़ौत और छपरौली में से मात्र एक सीट छपरौली से ही आरएलडी के पाले में आई थी और दो सीट बागपत और बड़ौत बीएसपी के प्रत्याशी जीते थे और लोकसभा चुनाव में भी चौधरी अजीत सिंह को हार नसीब हुई थी और बीजेपी के डॉ सत्यपाल सिंह को जीत मिली थी उसके बाद अब विधानसभा चुनाव नजदीक है तो अजीत सिंह को अपना अस्तित्व बचाने को एड़ी चोटी एक करनी पड़ रही है।

बागपत में मवीकलां गाँव में रैली को संबोधित करते हुए नतमस्तक होकर जनता को पुराने समय की याद दिलाकर अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए वोट मांग रहे थे वही चौधरी अजीत सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए बीजेपी को किसान विरोधी सरकार बताया तो अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जो अपने बाप का नही हुआ वो आपका क्या हो सकता है क्या मतभेद होते रहते है लेकिन कोई ऐसी दुर्गति अपने बाप की कर दे ये सहन करने वाली बात नही है वही रैली को संबोधित करने के बाद हेलीकॉप्टर को सिग्नल नही मिलने की वजह से नही उड़ सका और करीब 40 मिनट तक अजीत सिंह उसमे ही बैठे रहे।

 -अजय कुमार