पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट फैसला, समाधि में रहेंगे आशुतोष महाराज

चंडीगढ। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को पिछले तीन वर्ष से आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार के संबंध में लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश जारी किए हैं कि आशुतोष महाराज समाधि में ही रहेंगे और उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद डेरा नूरमहल से जुड़े एक वर्ग ने जहां राहत महसूस की है वहीं यह भी तय माना जा रहा है कि दूसरा वर्ग अब इस फैसले को चुनौती देगा। डेरा नूरमहल के संचालक आशुतोष महाराज मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे और वह लंबे समय से यहां डेरा चला रहे थे। 28 जनवरी 2014 की रात आशुतोष महाराज की अचानक मृत्यु हो गई। एक तरफ जहां उनकी अंतिम रस्मों की तैयारियां शुरू हो गई थी वहीं 29 जनवरी की सुबह डेरा नूरमहल के सेवादारों ने दावा किया कि आशुतोष महाराज की मृत्यु नहीं हुई है और वह गहन समाधि में चले गए हैं।

इसके बाद आशुतोष महाराज की मृत्यु को लेकर जहां पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई वहीं डेरे की हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति को लेकर भी याचिका दायर हुई। इस बीच पंजाब की पूर्व अकाली-भाजपा सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करके आशुतोष महाराज के शरीर की जांच करवाई तो डाक्टरों की टीम ने उन्हें क्लीनीकली डैड घोषित कर दिया।

इसके बाद आशुतोष महाराज की मृत्यु के मामले में हाईकोर्ट के सिंगल बैंच ने भी आदेश जारी कर दिए कि उनके शव को निपटा दिया जाए। सिंगल बैंच के फैसले को डबल बैंच के समक्ष चुनौती दी गई। लंबी बहस तथा दर्जनों गवाहों के बाद हाईकोर्ट के डबल बैंच ने आज कहा कि आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। उनकी समाधि जारी रहेगी। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पंजाब में डेरा नूरमहल से जुड़े अनुयायियों में नया विवाद शुरू हो गया है।