…तो क्या बसपा ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी से कर लिया किनारा!

लखनऊ। विधानसभा चुनावों के नतीजों का ऐलान होने के बाद बसपा एक्शन लेते हुए एक के बाद एक फैसले सुना रही है। गुरूवार(20-04-17) को बसपा ने पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को सभी पदों से हटा दिया है। हालांकि सिद्दीकी अब भी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पद पर कायम रहेंगे। बता दें कि विधानसभा चुनावों में बसपा को करारी शिकस्त का सामना करना था, जिसके बाद मायावती ने बड़े बदलाव के संकेत दिए थे।

भाई को सौंपी कमान

गौरतलब है कि गत दिनों मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को बसपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। आनंद कुमार को उपाध्यक्ष बनाते हुए मायावती ने साफ शब्दों में कहा था कि वो कभी सांसद, विधायक या मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। मायावती ने कहा था कि चुनावों के दौरान हमारे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया। उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर सबसे ज्यादा मुसलमानों को टिकट देने का आरोप लगाकर दुष्प्रचार किया गया।

महागठबंधन पर रुख साफ

आगामी चुनावों में भाजपा को रोकने के लिए महागठबंधन पर अपना रुख साफ करते हुए मायावती ने कहा कि अगर विरोधी पार्टियां बसपा के साथ विलय करना चाहती हैं तो उन्हें इसमें कोई परहेज नहीं है। आगे बोलते हुए मायावती ने कहा कि अब वो वक्त आ गया है जब जहर को जहर से काटना जरूरी हो गया है।