डिजिटल युग में प्रवेश करेगा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

अजमेर। 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद पूरे देश में कैशलैस ही एक अलग ही धारा बह रही है। शहरों में ज्यादातर लोग रोजाना का सामान खरीदने और अन्य कामों के लिए कार्ड का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। कैशलैस की इस मुहिम में अब राजस्थान शिक्षा बोर्ड ने भी मोदी सरकार के साथ आ गया है।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने खुद को डिजिटल रूप देने का फैसला किया है। बोर्ड के ज्यादातर काम अब भी कैशलैस ही हो रहे हैं लेकिन अधिकतर बड़े वित्तीय काम चैक और ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से होता है।

बोर्ड की ओर से ऐलान किय़ा गया है कि अब सभी कैश काउन्टरों को भी डिजिटल किया जाएगा। कैश काउन्टरों को डिजिटल करने के लिए बोर्ड ने अपने सहय़ोगी बैंक के साथ योजना बनानी शुरू कर दी है। बोर्ड द्वारा किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक शुरूआत में काउंटरों की संख्या को सीमित करके वहां पर स्वाइप मशीन लगाई जाएगी, बाद में इसे पूरी तरह डिजिटल में तब्दील कर दिया जाएगा।

बोर्ड द्वारा कहा गया है कि मुख्य विद्यालय के अलावा संभाग के मुख्यालयों और कई जिलों में स्थापित विद्यार्थी सेवा केंद्रों पर भी वित्तीय कामकाज को पूरी तरह से कैशलैस करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले सेशन से पहले बोर्ड इस बात का आधिकारिक ऐलान कर सकता है।

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जानकारों का कहना है कि बोर्ड को इस काम के लिए एक यूपीआई एड्रेस तैयार करना होगा, जिसके जरिए 30 टर्मिनल तैयार करना होगा। इससे बच्चों द्वारा जमा की गई राशि सीधे बोर्ड के खाते में जाएगी, जिससे बोर्ड को फायदा होगा। साथ ही कैश पर मिलने वाले ब्याज से बोर्ड को फायदे के आसार है। जानकारों का यह भी मानना है कि अधिकारियों द्वारा विद्यार्थियों से पैसे तो ले लिए जाते थे लेकिन तय समय में खाते में जमा नहीं करवाए जाते थे, जिसके कारण कई बार बोर्ड को नुकसान झेलना पड़ा है। पूर्ण रूप से कैशलैस होने पर बोर्ड को तो सीधा फायदा होगा ही साथ ही बोर्ड में जो भ्रष्टाचार फैला हुआ है वो भी खत्म हो जाएगा।

बता दें कि वर्तमान समय में टीसी, माईग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेजों की नकल लेने के लिए बोर्ड नकद राशि के जरिए ही भुगतान कर रहा है।