राम मंदिर का मुद्दा आपसी सुलह या कानूनी ढंग से सुलझेगा: अमित शाह

नई दिल्ली। साल के अंत तक राजस्थान में विधानसभा चुनाव संपन्न होने हैं। राजस्थान में बीजेपी की सरकार है और वो इस बार भी पूरी कोशिश करेगी की उसी की ही सरकार बनी रहे। ये बात और है कि राजस्थान में सत्ता परिवर्तन होता आया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने चुनाव जीतने के लिए रणनीति शुरू कर दी है। इसी के चलते अमित शाह ने जयपुर का दौरा किया और पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की। अमित शाह ने बैठक में मीडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी का मानना है कि विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराए जाए। शाह ने जयपुर में अपने दूसरे दिन पार्टी प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बात करने के बीच एक सवाल के जवाब में कहा कि बीजेपी की भी ये मान्यता है और सरकार की भी मान्यता है और पीएम मोदी ने इस बात को सभी दलों के सामने भी रखा और इसी पर बहस कर के दोनों दलों को चुनाव आयोग से बात करनी चाहिए।

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बता दें कि अनुसूचित जाति और जनजाति के सवालों पर अमित शाह ने जवाब में कहा कि इस मुद्दे पर सभी दलों से बात करने के बाद कानून बनना चाहिए। किसानों की कर्ज माफी पर शाह ने कहा कि इस बारे में केंद्र सरकार को कुछ नहीं सोचना है। इस बारे में वित्त मंत्री पहले ही साफ कर चुके हैं कि राज्य सरकारें अपने स्तर पर विचार करके फैसला लेंगे। अमित शाह ने राम मंदिर के सवाल पर कहा कि इस मुद्दे को लेकर पार्टी की राय साफ है। इसका उल्लेख एक नहीं बल्कि चार लोकसभा चुनाव के घोषणपत्र में है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा कानूनी ढंग या आपसी संवाद से ही सुलझाया जा सकता है।

वहीं अमित शाह ने पहली सरकार का नाम लिए बिना कहा कि पहले एसी सरकार थी जो हर महीने-दूसरे महीने भ्रष्टाचार या घोटालों के नाम से जानी जाती थी। लेकिन विगत तीन साल के दौरान भाजपा के विरोधी भी नरेन्द्र मोदी या भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा सके हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पारदर्शी फैसले लेने वाली सरकार है जिसके कारण भारत दुनिया में सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में जाना जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आजादी के बाद से सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं। सरकार बनने के बाद जिस प्रकार से भाजपा को एक के बाद एक जनादेश मिला है वह यही बताता है कि भाजपा के कामकाज की सराहना जनता कर रही है।