जन्मदिन स्पेशल: जाने गुलजार साहब के बारे में कुछ दिलचस्प बातें

नई दिल्ली। गुलजार साहब का असली नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा है। साथ ही वो हिंदी फिल्मों के गीतकार है जिन्होंने एक से बड़ कर एक गीत लिखे हैं जो आज भी लोगों की जुबां पर छाए हुए है। गुलजार साहब गीतकार होने के साथ-साथ एक कवि, पटकथा लेखक, नाटककार, और फिल्म निर्देश भी हैं। उन्होंने अपनी मुख्य रचनाएं हिंदी, उर्दू और पंजाबी में लिखी हैं। गुलजार साहब को साल 2002 में सहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था। इतना ही नहीं गुलजार साहब को साल 2004 में पद्म भूषण पुरूस्कार से भी नवाजा जा चुका है। गुलजार साहब को उनके सबसे चर्चित गीत जय हो के लिए ऑस्कर अवॉर्ड दिया गया। इसी गीत के लिए उन्हें ग्रैमी अवॉर्ड दिया गया था। गुलजार साहब ने 15 मई सन 1973 में बॉलीवुड अभिनेत्री राखी से शादी की थी। हालांकि इनकी शादी ज्यादा नहीं चल पाई और दोनों का रिश्ता टूट गया।

gulzar sahab birthday

बता दें कि गुलजार साहब का जन्म झेलम जिला पंजाब के दीना गांव में हुआ था। जो अब पाकिस्तान में है। गुलजार साहब के पिता ने दो शादियां की थी गुलजार दूसरी पत्नी की एक लौती संतान है। उनकी मां उन्हें बचपन में ही छोड़कर चल बसी थीं। मां के प्यार और पिता के दुलार से वंचित गुलजार साहब अपने नौ सौतेले भाई-बहनों में चौथे नंबर के थे। बंटवारे के बाद गुलजार साहब का परिवार अमृतसर आकर बस गया और गुलजार साबह मुंबई चले गए वहां वो एक गेरेज में बतौर मैकेनिक काम करने लगें और जो भी खाली समय उनको मिलता था उसमे वो कविताएं लिखते थे।

फिल्मी करियर

गुलजार साहब ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत विमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी और होमंत कुमार के साहयक को तौर पर की थी। गुलजार सहाब ने अपना पहला गीत विमल की फिल्म बंदनी के लिए लिखा। गुलजार त्रिवेणी छन्द के सृजक हैं। गुलजार ने अपना करियर बतौर निर्देशक 1961 में मेरे अपने से किया था। उसके बाद 1962 में आयी संजीव कुमार और जया भादुड़ी अभिनीत फिल्म कोशिश की जो एक गूंगे बहरे दम्पति के जीवन पर बनी थी। इस फिल्म ने आलोचकों को भी हैरान कर दिया था। इसके बाद गुलजार साहब ने संजीव कुमार के साथ ही आंधी, मौसम, अंगूर, और नमकीन जैसी फिल्में की। फिल्मों के अलावा गुलजार साहब ने कई ऐसे गाने लिखे जो दर्शकों की जुबां से आज भी गुनगुनाए जाते हैं। गुलजार साहब ने तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं मैं, तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं, आज कल पांव जमी पर नहीं पड़ते मेरे, आने वाला पल जाने वाला है जैसे मशहूर गाने लिखे। इतना ही नहीं गुलजार साहब ने नई फिल्मों में भी अपने गानों की तड़का बाखूबी लगाया है उन्होंने बिड़ी जलाई ले जिगर से पिया, कजरा रे कजरा रे तेरे कारे-कारे नैना, दिल तो बच्चा है जी, जैसे मशहूर गाने लिखे जो आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।