ऐसा नामाकंन हुआ पहली बार, सब हो गए हैरान

शाहजहांपुर।अभी तक आपने प्रत्याशियों को नामांकन कराने जाते हुए लग्जरी गाड़ियों मे देखते होगे तो कोई बाईक पर या फिर भैंस पर जाते हुए देखा होगा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे प्रत्याशी को दिखाएंगे जो अर्थी पर लेटकर अपना नामांकन कराने पहुंचा। इस दौरान ये प्रत्याशी चर्चा की विषय बन गया। इस प्रत्याशी के साथ भारी भीड़ भी नामांकन मे पहुची। हालांकि सुरक्षा कारणों का चलते खिरनीबाग चौराहे पर लगे बैरिकेडिंग के पास तैनात पुलिस ने प्रत्याशी को अर्थी से उतार दिया और उसके बाद ये प्रत्याशी अपने पैरों पर चल कर नामांकन कक्ष तक पहुचा। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी की माने तो वह इस महिने मे करीब एक लाख अपने जीजा बनाएंगे रोज वह घरो घर जाकर एक लाख बहनो से राखी बंधवाकर वोट मानेंगे।

  

दरअसल आज नगर विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मे वैधराज किशन ने अपना नामांकन कराया। वैधराज किशन का नामांकन पूरे शहद मे चर्चा मे रहा। क्योंकि वैधराज न तो लग्जरी गाड़ी मे बैठकर गए न वह बाईक पर बैठकर गए और नही वह भैंस पर बैठकर नामांकन कराया। लेकिन इनका अनोखा तरीका था कि वह एक अर्थी पर लेटकर चार कंधो पर जाकर अपना नामांकन कराया। इस दौरान वह घंटाघर से होते हुए बहादुरगंज मार्केट से होते हुए खिरनीबाग मैदान तक पहुचे। इस दौरान जिसकी भी नजर प्रत्याशी की अर्थी पर पड़ी तो कोई भी शख्स हसने से रोक नही पाया।

इस दौरान प्रत्याशी वैधराज किशन अर्थी पर लेटे रहे और लोग उन्हे कंधे का सहारा देकर एक चारपाई पर ले जाते रहे। लेकिन जब ये अर्थी खिरनीबाग मैदान तक पहुची तो वहां पर लगे बैरिकेडिंग के पास मौजूद पुलिस कर्मियों ने अर्थी को कलेक्ट्रेट परिसर के पास जाने से मना कर दिया। इस दौरान पुलिस से प्रत्याशी की कुछ कहासुनी भी हुई। लेकिन पुलिस ने एक न सुनी और प्रत्याशी को अर्थी पर उतरने को मजबूर कर दिया। उसके बाद उनके साथ नामांकन कक्ष तक उनके साथ पांच लोग पहुचे। हालांकि जब बैरिकेडिंग के पास जब प्रत्याशी वैधराज किशन अर्थी पर से उतरे तो उसके बाद भी लोग उनको देखने के लिए उत्साहित थे क्योंकि प्रत्याशी कफन के कपङो मे थे। आपको बता दें वैधराज किशन इससे पहले लोकसभा का चुनाव लङ चुके है उस वक्त भी नामांकन कराने वैधराज किशन भैंस पर बैठ कर गए थे।

प्रत्याशी वैधराज किशन की माने तो वह अर्थी पर लेटकर इसलिए नामांकन कराने आए हैं क्योंकि इस वक्त जितने भी नेता है। उनके जमीर मर चुके हैं। मरने वालो पर वह राजनीति करते हैं उन नेताओ के दिलो से प्यार मर चुका है। इसलिए वह अर्थी पर लेटकर नामांकन कराने आए हैं इससे जनता को एक मैसेज जाएगा कि आज के नेता मर चुके हैं। ये अर्थी देखकर पहचानो। इससे बाद वह नामांकन कक्ष मे नामांकन कराने के बाद अपने क्षेत्र मे चले गये।

अभिषेक, संवाददाता