पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प उत्सव शुक्रवार से

जोधपुर। राजस्थान लघु उद्योग लिमिटेड और जिला उद्योग केन्द्र जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में 27वां पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प उत्सव तीन से 12 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस मेले का उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि उद्योग मंत्री राजपालसिंह शेखावत करेंगे, जबकि समारोह की अध्यक्षता जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री सुरेन्द्र गोयल करेंग। इस उत्सव की मुख्य दो खासियत राज्य स्तरीय हैण्डीक्राफ्ट आर्टिजन अवार्ड वितरण समारोह और राज्य स्तरीय क्रेता विक्रेता सम्मेलन होगा।

उत्सव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख कार्यक्रम मेक इन इंडिया, कौशल विकास, कैशलेस ट्रांजेक्शन, डिजिटल इंडिया, जीरो इफेक्ट जीरो डिफेक्ट योजना, रिन्यूबल एनर्जी और समसामायिक विषय पर केन्द्रीय रहेगा। 27 साल पहले 200 स्थानीय उद्यमियों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने की नीयत से इस मेले को शुरू किया था, जो अब बढ़कर 700 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। जिसमें हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस उत्सव में केन्द्र व राज्य के उद्योगों से संबंधित सभी विभाग अपनी भागीदारी निभाएंगे।

इस उत्सव में सौर उर्जा और पवन ऊर्जा के राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बनी पहचान को ऐसे उद्योग लगाने के लिए उद्योगपतियों को आकर्षित कर रहा है। उत्सव स्थल पर सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, होमगार्ड एवं जिला सुरक्षा एजेन्सी द्वारा की जाएगी और हाई डेफिनेशन के सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। उत्सव का मुख्य आकर्षण विजयराजे सिंधिया केन्द्रीय पांडाल होगा, जो 84 गुणा 120 फीट के विशाल डोम से निर्मित होगा। इस पाण्डाल में शिल्पियों व उद्यर्मियों द्वारा निर्मित उत्पादों का नि:शुल्क प्रदर्शन किया जाता है। इस प्रदर्शन के माध्यम से आमजन को जोधपुर में हो रहे औद्योगिक विकास की एक संपूर्ण झलक देखने का अवसर मिलेगा। पांडाल में ट्रेडिशनल आर्ट, तत्कालीन वाद्य यंत्र, मेटल एवं लकड़ी के उत्कृष्ट हस्तशिल्प, पाषाण निर्मित हस्तशिल्प अवलोकन हेतु प्रदर्शित किए जाते हैं। इस प्रकार के केन्द्रीय पांडाल का निर्माण केवल जोधपुर के ही उत्सव में किया जाता है।

उत्सव में सम्पूर्ण भारत वर्ष से लघु उद्यमी व शिल्पी अपने उत्पाद व कला का प्रदर्शन एवं बिक्री करेंगे। उत्सव स्थल पर ही कुछ उत्पाद निर्माण का जीवंत प्रदर्शन भी किया जाएगा। पंडित दीनदायल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में यह मेला उनको समर्पित करते हुए संगोष्ठी एवं कार्यक्रम पंडाल का नामकरण भी उनके नाम से किया गया है।