रक्षा बंधन पर होगा भद्रा व चंद्र ग्रहण का साया, तीन घंटे ही राखी बांध पाएंगे भाई-बहन

मंदसौर। सावन माह के आखिरी सोमवार सात अगस्त को रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाने वाला है। पंडितों एवं शास्त्रियों के अनुसार इस दिन चंद्रग्रहण का भी योग बन रहा है। यह योग 12 साल बाद बना है। इससे पहले 2005 में चंद्रग्रहण लगा था। इस दिन ग्रहण काल और भद्रा का भी असर ग्रह मंडल में देखा जाएगा। इससे राखी बांधने का मुहूर्त तीन घंटे का ही रहेगा।

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पंडित देवेंद्र शर्मा ने बताया कि सात अगस्त को रात 10.53 से चंद्रग्रहण शुरू होगा। इसका मोक्षकाल देर रात 12.48 तक रहेगा। चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण काल से 9 घंटे पहले लगता है। रक्षा बंधन के दिन सूतक दोपहर 1.53 से शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही सुबह 11.04 बजे तक भद्रा रहेगा। सूतक और भद्राकाल में सभी शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। इस कारण रक्षा बंधन का पर्व प्रभावित होगा। राखी भद्रा की समाप्ति और सूतक लगने से पहले मिलने वाले शुभ मुहूर्त में ही बहने अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी।

ऐसे में सुबह 11.05 बजे से लेकर दोपहर 1.13 मिनट तक रक्षा बंधन का पर्व मनाया जा सकता है। ग्रहण की अवधि एक घंटे 55 मिनट रहेगी। चंद्रग्रहण पूर्ण न होकर खंड ग्रास होगा। संपूर्ण भारत में यह ग्रहण दिखाई देगा। सभी जगह ग्रहण का प्रभाव रहेगा। इस समय मकर राशि स्थित चंद्रमा पर सूर्य नीच राशि में मंगल व शनि की कुदृष्टि रहेगी जो कि अराजकता लूटपाट, अपहरण, फसलों के लिए नुकसानदायक रहता है।

पंडित देवेंद्र शर्मा ने बताय कि उत्तर भारत में पंजाब, दिल्ली हरियाणा आदि प्रांत है। प्रात:काल में ही राखी बांधने का शुभ कार्य किया जा सकता है। परंपरावश अगर किसी व्यक्ति को परिस्थितिवश भद्राकाल में ही रक्षा बंधन का कार्य करना है तो भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छकाल में रक्षा बंधन का कार्य करना शुभ रहता है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा के पुच्छकाल में कार्य करने से कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है। परंतु भद्रा के पुच्छकाल का प्रयोग शुभ कार्यों के लिए विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। सूतक लगने से शुभ कार्य के साथ साथ मंदिरों में स्थापित भगवान के गर्भगृह को भी स्पर्श नही करना चाहिए। इसे शास्त्रों में वर्जित माना गया है।