खूब सुर्खियां बटोर रहा है रेगिस्तान के बीच बना ये सोलर पार्क

रेगिस्तान। रेगिस्तान  में कुछ इलाके ऐसे हैं जिनका नाम भी लोगों ने नहीं सुना होगी और न ही वहां पर्यटक जाते हैं। क्योंकि वहां जाने और देखने के लिए कुछ नहीं होता। रोगिस्तान में ऐसी ही एक जहग है भड़ला जिसको शायद ही कोई जानता हो। लेकिन फिर भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ये जगह चर्चा का सबब बनी हुई है। क्योंकि हाल ही में यहां 250 मेगावाट का सोलर पावर प्रोजेक्ट सबसे कम दामों में बिका है। दक्षिण अफ्रीका की फेलन एनर्जी ने यहाँ ऑक्शन 2.62 रुपये प्रति किलोवाट की देर पर जीता जोकि कोयले से भी कम है।

बता दें कि भड़ला में बना ये सोलर पार्क स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत का सबसे बड़ी कोशिश है। ये देश का सबसे बड़ा पार्क है। 10 हज़ार एकड़ यानी 40 वर्ग किमी में बना ये सोलर पार्क कभी रेगिस्तान में बंजर पड़ा रहता था। जब देश का ये सबसे बड़ा सोलर पार्क पूरी तरह शुरू हो जाएगा तो इसमें 2255 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा फिलहाल यहां सूरज की रौशनी से 480 मेगावाट बिजली तैयार की जा रही है।

वहीं यहां 1000 से ज़्यादा इंजीनियर, तकनीशियन और मजदूर 24 घंटे यहां काम करते हैं। 11 सोलर प्‍लांट ने बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है। सभी जगह से बिजली एक ग्रिड पर आती है, और फिर इससे एकत्र होकर एक 400 किलोवाट के ग्रिड सब स्‍टेशन से ऊर्जा पूरे राज्य में पहुंचाई जाती है। इससे पहले यहां किसी भी तरह की कोई आजीविका के अलावा पशुपालन का कोई साधन यहां मौजूद नहीं था। लेकिन स्थानीय लोगों के लिए इस मरू प्रदेश में भड़ला ने आजीविका के साधन उपलब्ध करवाए।

ऐसा ही एक और उदाहरण 26 साल का रोहिताश है। यह पिछड़े हुए बिश्नोई समुदाय से है। लेकिन सोलर में अवसर देखते हुए रोहिताश ने पास के एक कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। अब वो विक्रम सोलर में नौकरी करता है और 40 हजार रुपये रुपये महीना कमाता है। इस मसले पर रोहिताश बिश्‍नोई का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में पहले लोग या तो सरकारी नौकरी की तरफ जाते थे या फिर पुलिस में भर्ती होने की कोशिश करते थे, अब मेरे सामने मैंने देखा है की पिछले 4 साल में 100 से ज़्यादा युवाओं ने टेक्निकल कोर्स में दाखिला लिया है और यहां से लोकल 40 इंजीनियर इस सोलर पार्क में अलग अलग प्लांट में नौकरी कर रहे हैं।