सतपाल महाराज: गंगोत्री पर्यटन रूट से जुड़ेगा लाखा मंडल

उत्तराखंड। दो दिवसीय पर्वतीय सांस्कृतिक बिस्सू मेला लखामंडल का आगाज रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ धूमधाम से हुआ। लोक गायक मीना राणा व किसन के गीतों पर लोग जमकर झूमें। इस मौके पर मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पांडवकालीन महत्व की देवभूमि लाखामंडल को गंगोत्री पर्यटन रूट से जोड़ा जायेगा।

जौनसार बावर विकास समिति के तत्वाधान में लाखा मंडल में दो दिवसीय पर्वतीय सांस्कृतिक बिस्सू महोत्सव का शुभारंभ पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

द वाइस ऑफ किडे फेम टीवी सीरियल की कलाकार सृष्टि रावत ने हिंदी व जौनसारी गीत नृत्यों की प्रस्तुति देकर सबका दिल जीत लिया। इस मौके पर लोक गायिका मीना राणा, किशन महिपाल, सनी दयाल के गीत नृत्यों पर लोग जमकर झूमे। गढवाली गायिका मीना राणा ने जौनसारी गीत दूर देण बाबा साउरे बोइद कोई आईना पर दर्शक जमकर थिरके। मीना राणा ने अगलाड की माछी जमुना कू पाणी गीत पर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

लोक गायक किसन ने फ्यूल दिया से देखक मान मां आंदू विचार व घूघती गीत पर लोग जमकर नाचे। नंदलाल भारती की महासू वंदना ने सबका मन भाया। इस मौके पर मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि लाखामंडल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा।

लाखामंडल में सभी सुबिधायें जोडी जायेंगी। जिससे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके। कहा कि जौनसार बावर के रमणीक पर्यटक स्थलों पर आधारभूत सुबिधायें सुलभ करायी जायेंगी। जिससे देश विदेश के पर्यटकों को सुबिधायें मिल सकें। कहा कि जौनसार बावर के विकास में कोई कमी नहीं रहने दी जायेगी।

इस मौके पर जौनसार बावर विकास समिति के अध्यक्ष गीताराम गौड ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान, पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा, भाजपा नेता मूरत राम शर्मा, सुशील गौड़, दिनेश पंवार, विक्रम, आनंद, सरदारसिंह आदि मौजूद रहे

जब युधिष्ठिर को युवराज घोषित किया गया, तो दुर्योधन को ये बात बिलकुल पसंद नहीं आई और उसने ईर्ष्या के कारण पांडवों को मारने के लिए लाक्षागृह बनवाया था। उसने छल से पांडवों को माता कुंती के साथ मेला देखने जाने के लिए कहा और उनको विश्राम करने के लिए लाक्षागृह में जाने के लिए कहा, ताकि वो उनको लाक से बने इस महल में जलाकर मार सके।

लेकिन विदुर जिनको दिव्य दृष्टि प्राप्त थी, ने इसके बारे में पांडवों को समय रहते सूचित कर दिया और दुर्योधन की ये चाल असफल हो गई। वैसे तो लाक्षागृह जल कर खाक हो गया था लेकिन आज भी वो जगह मौजूद है, जहां दुर्योधन ने लाक का यह महल बनवाया था। जी हां, आज हम आपको उसी के बारे में बताने जा रहे हैं। देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड में स्थित है, लाखामंडल की पौराणिक गुफा, जहां महाभारत काल में पांडवों को एक नया जीवन मिला था।

प्राकृतिक सुंदरता के बीच सुन्दर वादियों में बसा लाखामंडल गांव यमुना नदी के किनारे स्थित है। बेहद ही खूबसूरत और आकर्षित करने वाला यह स्थान गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ हैं। इस गांव के लोगों के मुताबिक़, इस मंदिर और इसके आस-पास का क्षेत्र, महाभारत के एक प्रकरण से सम्बंधित है।

प्रकरण के अनुसार, दुर्योधन ने लाक या लाह से लाक्षागृह का निर्माण पांडवों को जिंदा जलाने के एक षड़यंत्र को अंजाम देने के इरादे से किया था। लोगों का मानना है कि लाक्षागृह, लाखामंडल के आस-पास ही निर्मित हुआ था। महाभारत के अनुसार, जब लाक्षागृह को जला दिया गया था, तब पांडवों ने एक सुरंग की मदद से अपने प्राणों की रक्षा की थी. ऐसी मान्यता है कि वह सुरंग एक गुफा के मुहाने पर जा कर खुलती है, जो अभी भी लाखामंडल में मौजूद है।