डायबिटीज से रहिए अलर्ट, कैंसर में मिलेगी मदद

नई दिल्ली। यह अतिशयोक्तिपूर्ण लग सकता है, लेकिन पिछले 15 वर्षों में टाइप-2 मधुमेह में अभूतपूर्व वृद्धि और घातक बीमारी कैंसर की वृद्धि में कुछ समानता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि हमारी दिनचर्या कुछ परिवर्तनीय कारकों और जोखिमपूर्ण तथ्यों से जुड़ी हुई है। इसमें उम्र, लिंग, मोटापा, शारीरिक सक्रियता, आहार, शराब का सेवन और धूम्रपान शामिल है। गुड़गाव के कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजिस्ट अनिल धर ने आईएएनएस को बताया, “80 से 90 फीसदी कैंसर के मामलों के लिए पर्यावरणीय कारक और विशेष रूप से अनियमित जीवनशैली जिम्मेदार है जो मधुमेह के बढ़ते मामलों के लिए भी उत्तरदायी है।”

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धर ने कहा कि जीवनशैली में उचित बदलाव से दोनों बीमारियों में मृत्यु दर और रोगियों की संख्या में कमी देखी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 13 सालों में मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या में 100 फीसदी वृद्धि हुई है। यह साल 2013 में 6.3 करोड़ हो गई है जो साल 2000 के 3.2 करोड़ से दोगुनी है। साल 2030 तक इस संख्या में 10.1 करोड़ की वृद्धि होने का अनुमान है। पिछले महीने स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा था, “विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 लाख से ज्यादा मामले भारत में दर्ज हुए हैं और करीब 680,000 लोगों की मौत कैंसर से हुई है।”

नोएडा स्थित जेपी अस्पताल की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट पूर्णिमा अग्रवाल के अनुसार, भयानक दुष्प्रभाव के साथ मधुमेह और कैंसर आम बीमारियां हैं। दुनिया भर में स्वास्थ्य और महामारी विज्ञान के अध्ययन से पता चला है कि मधुमेह से पीड़ित लोगों को कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है। हालांकि कैंसर और मधुमेह के बीच की सटीक जैविक कड़ी को पूरी तरह से समझा जाना अभी बाकी है। सामान्य तंत्र और विशेष ऊतक तंत्र दोनों रोगों के बीच की संभावित कड़ी हो सकती है।

पूर्णिमा ने आईएएनएस को बताया, “हाइपरग्लाइसेमिया या रक्त धमनियों में ग्लूकोज की अधिकता पुराना सूजन और मोटापा बढ़ाती हैं। साथ ही ऑक्सीडेटिव तनाव का कारण भी बनती हैं। इससे कैंसर होने का खतरा भी बढ़ सकता है।”

गुड़गांव के पारस अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट सिद्धार्थ कुमार का कहना है कि टाइप-2 मधुमेह का संबंध जिगर, अग्नाशय, गुर्दे, स्तन और गर्भाशय की भीतरी झिल्ली के कैंसर से है। वहीं अग्रवाल का कहना है कि मोटापा मधुमेह होने का एक प्रमुख कारक माना जाता है। ऐसे मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, जिसमें मोटापा की वजह से स्तन कैंसर, पेट का कैंसर और एंडोमेट्रियल कैंसर होने की आशंका बढ़ी है। कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए हम क्या खाते हैं, यह भी मायने रखता है। कम फाइबर युक्त प्रचुर मात्रा में रेड मीट (लाल मांस) और प्रसंस्कृत मांस खाने से भी टाइप-2 मधुमेह और कैंसर होने की संभावना ज्यादा रहती है।

मधुमेह और कैंसर के साथ जुड़ा हुआ दूसरा जोखिमपूर्ण कारक धूम्रपान है। एक अनुमान के अनुसार, पूरी दुनिया में 71 फीसदी फेफड़ों के कैंसर के लिए तंबाकू जिम्मेदार है। एक अध्ययन के मुताबिक, धूम्रपान भी स्वतंत्र रूप से मधुमेह की संभावना बढ़ाने वाला एक जोखिमपूर्ण कारक है। सीमित मात्रा में शराब के सेवन से मौखिक गुहा, घेघा, जिगर और पेट का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। अधिक मात्रा में शराब का सेवन भी टाइप-2 मधुमेह के लिए एक जोखिमपूर्ण कारक है।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों को जन्म देने वाले इन जोखिमपूर्ण कारकों के बीच की समानता और अंतर को समझकर हम इसकी मदद से घातक बीमारियों को रोक सकते हैं।