‘पीएम से कहिए पाकिस्तान का नाम नक्शे से मिटा दें’

पटना। देश के खातिर बिहार के एक जांबांज सपूत ने अपने जान की बाजी लगा दी। रविवार को उरी में हुए आतंकी हमले में कैमूर के नुआंव के बड्ढा गांव के राकेश शहीद हो गए, तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा, हर तरफ हाहाकार मची थी, पर शहीद राकेश की पत्नी किरण गम के अथाह सागर में डूबी अपने पति को गर्व से देख रही थीं। जितना गम अपने पति को खोने का था उतना ही गिस्सा किरण को पाकिस्तान से भी था, थोड़ा संभलती किरण ने प्रधानमंत्री से मांग कि ‘पीएम से कह दे पाकिस्तान का नाम मैप से मिटा दे’, यकीन मानिए आज किरण शहीद की विधवा नहीं, एक वीरांगना लग रही थीं।

shaheed-rakesh

 

गौरतलब है कि रविवार को उरी में हुए आतंकी हमले के दौरान बिहार राज्य के जांबाज बेटे राकेश ने आतंकियो से लड़ते हुए अपने जान की बाजी लगा दी। शहीद राकेश का शव मंगलवार को दस बजे उनके पैतृक गांव लाया गया तो जैसे उनके अंतिम दर्शन को पूरा कैमूर उमड़ पड़ा था। उनका शव गांव के मध्य विद्यालय परिसर में रखा गया, जहां शस्त्रों की सलामी व अन्य जरूरी कार्रवाई पूरी करने के बाद अंतिम संस्कार के लिए बक्सर ले जाया गया। गांव में शव के पहुंचते ही परिजनों के चीत्कार से सारा महौल गमगीन हो गया। साथी जवानों को अपने साथी को खोने का गम था। शहीद की पत्नी किरण ने अपनी पति के अंतिम दर्शन के बाद उन्हें सलामी दी। रोती-बिलखती सास से कहा कि मम्मी आप रोएंगी तो फिर हम कमजोर पड़ जाएंगे। एक साल के बेटे हर्ष से किरण ने कहा कि पापा पर फूल चढ़ा दो।

शव के सिरहाने खड़ी किरण ने मौजूद सैनिकों से दृढ़ता से कहा कि आप लोग पीएम मोदी के पास मेरा यह संदेश जरूर पहुंचा दें कि वे पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाएं कि उसका नाम वर्ल्ड मैप से ही हट जाए। पाकिस्तान से बातचीत नहीं बल्कि अब अंतिम लड़ाई होनी चाहिए। किरण के यह बहादुरी भरे उद्गार सुन जैसे साथी सैनिकों ने भी मौन सहमति जताई। वहां मौजूद नौजवान पाकिस्तान मुर्दाबाद व पाक को नेस्ताबूद करों के नारे लगाने लगे।बहू की हिम्मत देख शहीद के माता-पिता ने भी शोक से बाहर निकल पाकिस्तान को सबक सीखाने की बात कही। मां समुंदरी देवी ने सेना के जवानों से कहा कि बेटा के मौत का बदला जरूर लीह लोग, छोड़ही लोग मत। पिता हरिहर कुशवाहा ने कहा कि आप लोग मेरे पैगाम को सरकार तक पहुंचा दे, पाकिस्तान पर कार्रवाई नहीं हुई तो हम आमरण अनशन पर बैठेंगे।हिंदुस्तान जिंदाबाद के गगन भेदी नारों के बीच शव बक्सर रवाना किया गया, जहां पिता ने बेटे को मुखाग्नि दी।