देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में एशिया का प्रथम बाल्टिक केंद्र

हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में एशिया के प्रथम बाल्टिक केंद्र का उद्घाटन सात अगस्त को उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. के.के. पॉल सहित तीन देशों के राजदूतों की मौजूदगी में होगा। बाल्टिक समुद्र के निकट बसे लाटविया, एस्तोनिया, लिथुआनिया आदि देश बाल्टिक देश कहलाते हैं।

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देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या के अनुसार, “इस केंद्र के माध्यम से देसंविवि अपनी उपलब्धियों में एक और नगीना गढ़ा है। देसंविवि परिवार अपनी मातृ संस्था शांतिकुंज के साथ मिलकर विश्व के 70 से अधिक देशों में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने में जुटा है।”

पंड्या ने कहा है, “यह बाल्टिक केंद्र के माध्यम से 175015 वर्ग किलोमीटर में फैले बाल्टिक देशों में भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार का एक मंच मुहैया कराएगा। यह केंद्र विश्व की प्राचीन संस्कृति यानी देव संस्कृति एवं वैश्विक शिक्षा को बढ़ावा देने में सहयोगी के रूप में उभरेगा।”