पत्रकारिता के स्तम्भ आनंद बहादुर नहीं रहे, पंचतत्व में विलीन

वाराणसी। स्‍वतंत्रता आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर भागीदारी करने वाले काशी के पत्रकारिता के स्तम्भ, गुरूजी वरिष्‍ठ पत्रकार डा. अानंद बहादुर सिंह शनिवार को गोलोकवासी हो गये। 86 वर्ष की अवस्‍था में डा. सिंह ने भोर में बीएचयू के सर सुन्‍दर लाल अस्‍पताल में अन्तिम सांसें ली। इसकी जानकारी मिलते ही शहर के पत्रकारों में शोक की लहर दौड़ गयी।

आनन-फानन में उनके आवास पर श्रद्धाजंलि देने के लिए पत्रकारों साहित्यकारों का तांता लग गया। प्रदेश शासन की ओर से एसपी सिटी दिनेश सिंह ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किया।

दोपहर में उनकी अन्तिम यात्रा अस्सी भदैनी स्थित आवास से हरिश्चन्द्रघाट के लिए निकली जिसमें पत्रकारों-साहित्यकारों व विभिन्न दलो के नेताओं का हुजुम उमड़ पड़ा। घाट पर उनका अन्तिम संस्कार पुत्र विजय बहादुर सिंह ने किया। घर और घाट पर श्रद्धाजंलि देने वालों में संकटमोचन मंदिर के महन्त प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र, काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुभाष सिंह, महामंत्री डा.अत्रि भारद्वाज, वरिष्ठ कार्टूनिस्ट पत्रकार जगत शर्मा आदि शामिल रहे।

गौरतलब है कि 29 अगस्त 1930 को लोलारक छठ पर राजा टोडरमल के बंश में जन्म लेने वाले डा. आनंद बहादुर सिंह ने स्‍वतंत्रता आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। धार्मिक स्वभाव के चलते धर्म सम्राट स्‍वामी करपात्री जी द्धारा स्‍थापित सांध्‍य कालीन अखबार सन्मार्ग से जुड़े। पत्रकारिता के उच्च मानदंडो को जीते हुए अखबार के संपादक के साथ-साथ काशी पत्रकार संघ्‍ा के संस्‍थापक सदस्‍यों में से रहे।

शंकराचार्य स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती महाराज ने इन्‍हें संपादकाचार्य की उपाधि से सम्‍मानित किया था। डा. सिंह की तुलसीकृत रामचरित मानस पर भी अच्छी पकड़ रही। पांच दिन पूर्व हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें सर सुन्दर लाल चिकित्सालय में भरती कराया था। डा. सिंह अपने पीछे एक पुत्र, पुत्रवधु, दो पुत्रियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं।