अमेरिका ने दिखाया पाकिस्तान को आईना

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा के समय जिस प्रकार से अमेरिका ने दोस्ताना व्यवहार किया है, वह निश्चित रुप से आतंकवाद को समाप्त करने की दिशा तय करने में सहायक होगा। भारत और अमेरिका की यह एकता इस्लामी आतंकवाद के विरोध में एक साझा अभियान है। इसमें भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है। इस चेतावनी के बाद पाकिस्तान में संरक्षण प्राप्त कर रहे आतंकवादियों में तो भय का वातावरण बना ही होगा, साथ ही पाकिस्तान पर लगे आतंकवादी देश के तमगे से भी पाकिस्तान में तिलमिलाहट का वातावरण बना होगा। अभी तक अमेरिका के सहारे अपनी नीतियों को अंजाम देने वाले पाकिस्तान के समक्ष अब जीने मरने जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। पाकिस्तान अब किस मुंह से अमेरिका का सामना करेगा, इतना ही नहीं विश्व के अनेक देश आज पाकिस्तान को संदिग्ध नजरों से देख रहे हैं, जो अब वास्तविकता सिद्ध होती जा रही है। यह कई अवसरों पर साबित हो चुका है कि पाकिस्तान आतंकवादी देश होने के साथ ही, आतंकियों की पनाहगार भी है। कई आतंकी आज भी पाकिस्तान में रहकर अपने आपको सुरक्षित किए हुए हैं। ऐसे क्या अब पाकिस्तान उनके विरोध में कार्यवाही करेगा, या फिर पहले की तरह अपने बचाव का रास्ता निकालने का प्रयास करेगा।

अमेरिका ने भी आतंकवाद के दंश को करीब से भोगा है। इसके साथ ही विश्व के अनेक देशों ने भी इस्लामिक आतंकवाद का साक्षात्कार किया है। वर्तमान में यह पूरी दुनिया जान चुकी है कि आतंकवाद कितना खतरनाक होता है। कश्मीर घाटी में भारत आतंकवाद को लम्बे समय से भोग रहा है। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने जम्मू कश्मीर सहित भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को दोषी ठहराया है। इतना ही नहीं पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद का संचालन करने वाले आतंकवादी सलाउद्दीन को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी की श्रेणी में रखकर पाकिस्तान को यह साफ संदेश दिया है कि कश्मीर पर केवल भारत का ही अधिकार है। इससे पाकिस्तान का कश्मीर पर किया जाने वाला दावा केवल खोखला साबित हुआ है। इसके बाद अब कश्मीर में पाकिस्तान के संरक्षण में अलगाव को हवा देने वाले आतंकी नेताओं के अभियान को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि भारत बहुत पहले से प्रमाणों के साथ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के बारे में अपना मजबूत पक्ष रखता रहा है, लेकिन उस समय भारत की बात कोई सुनने को तैयार नहीं होता था। वर्तमान में भारत की बात को जिस प्रकार से प्रमुखता के साथ सुना जा रहा है, उसके पीछे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दुनिया के समक्ष भारत का पक्ष प्रबलतम तरीके से रखना भी माना जा रहा है।

हम जानते हैं कि पाकिस्तान ने दशकों से अमेरिका सहित विश्व के अनेक देशों को कश्मीर मुद्दे पर गुमराह करने का काम किया और आतंकवाद को समाप्त करने के लिए आर्थिक सहायता भी प्राप्त की। इसके बाद भी पाकिस्तान ने आतंकवाद को समाप्त करने के लिए वैसे जरूरी कदम नहीं उठाए, जैसी अपेक्षा की जा रही थी। इसका एक मात्र कारण यही कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादियों पर वहां की सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।
पाकिस्तान ने हमेशा दोहरी नीति की राजनीति खेलने के कारण अमेरिका का समर्थन प्राप्त किया। वर्तमान में वातावरण पूरी तरह से बदल गया है। अमेरिका ने पाकिस्तान को दोषी मानकर उसके सपनों पर पानी फेरने का काम किया है। आतंकवादियों के सबसे सुरक्षित पनाहगार देश के रूप में कुख्यात हो चुके
पाकिस्तान की पोल तो उस समय खुल गई थी, जब अमेरिका ने बड़ी सैन्य कार्यवाही करके ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुसकर मौत के घाट उतार दिया था। हालांकि उसके बाद पाकिस्तान के पास अपने बचाव के लिए कोई शब्द नहीं थे। हालांकि अमेरिका की ओर से पाकिस्तान में की गई यह कार्यवाही बहुत पहले की हैं, लेकिन यह सत्य है कि डोनाल्ड ट्रम्प आतंकवाद के मुद्दे पर ज्यादा मुखर रहे हैं। इसलिए अब आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की दाल नहीं गलने वाली है। भारत और अमेरिका की इस दोस्ती के बाद निश्चित ही पाकिस्तान और चीन में घबराहट ही होगी, क्योंकि दोनों ही देश किसी न किसी तरीके से भारत के विरोध में खड़े होते दिखाई दिए हैं। चीन जिस प्रकार से पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है, उससे अब लगने लगा है कि आतंकवाद का दंश झेल रहे देशों की नजर में अब यह अलग थलग पड़ते हुए दिखाई देंगे। इसमें एक तर्कसंगत बात यह भी है कि आतंकवाद को संचालित करने वाले देश का समर्थन करना भी आतंक को बढ़ावा देने का कृत्य है और यही काम चीन भी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस अमेरिका दौरे ने पाकिस्तान को पूरी तरह से बेनकाव कर दिया है। पाकिस्तान कितना भी तर्क दे, लेकिन अब पाकिस्तान अपने आपको आतंकवादी देश के ठप्पे से बचा पाने में असमर्थ ही होगा।