थर्ड पार्टी की बिक्री में फर्जीवाड़े में पहली बार सख्त हुआ रिजर्व बैंक

नई दिल्ली। पहली बार इंश्योरेंस पॉलिसी या म्यूचुअल फंड स्कीम जैसे थर्ड पार्टी प्रॉडक्ट्स को गलत तरीके से बेचने के लिए बैंकों की जिम्मेदारी तय की गई हैं। ग्राहक को मोबाइल और डिजीटल बैंकिग सर्विस के लिए बैंकों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकों की ओर से थर्ड पार्टी इंन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स की ब्रिकी में पैदा हुई गड़बड़ियों समेत बैंकिंग ऑम्बड्समैन स्कीम 2006 का दायरा बढ़ा दिया है संशोधित स्कीम के तहत ग्राहक मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक बैंकिग सर्विस को लेकर रिजर्व बैंक के निर्देशों का पालन नहीं करने पर बैंकों केखिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

संशोधन के बाद फैसला देने का लोकपाल का आर्थिक न्यायक्षेत्र 10 लाख रुपए से दोगुना 20 लाख रुपए कर दिया गया है लोकपाल को कानूनी लड़ाई लड़ने में शिकायतक्ता के बर्बाद हुए वक्त इस प्रक्रिया की लागत उत्पीड़न और मानसिक पीड़ा के लिए एक लाख रुपए तक का मुआवजा तय करने का अधिकार दिया गया है ग्राहकों के पास शिकायत के उन वैसे मामलों की भी अपील कर सकते हैं जो क्लोज कर दिए गए हैं।

इंश्योरेंस पॉलिसी या म्यूचुअल फंड लेने के बाद फर्जीवाड़े का पता चलने पर ग्राहकों को संबोधित इंश्योरेंस कंपनी या म्यूचुअल फंड के पास ही गुहार लगाना पड़ता है यह दुनियाभर में लागू कानूनों के मुताबिक नहीं था। बीते साल यूके के चार बड़े बैंकों बार्क्लेंज एचएसबीसी लॉयड्स और आरबीएस को पेमेंट प्रोटेक्शन इंश्योंरेंस की गलत जानकारी देने के एवज में भारी जुर्माना लगाया हैं।
वित्त वर्ष 2016 में बैंकिग लोकपाल को 1.03 लाख सिकायते मिली जिनमें 95 प्रतिशत का निपटारा हो गया इनमें सबसे ज्यादा 34 प्रतिशत का निपटारा हो गया इनमें सबसे ज्यादा 34 प्रतिशत शिकायतें वादा पूरा करने और नियमों का उचित पालन करने से नहीं जुड़ी थी वहीं एटीएम डेबिट कार्ड की 12.71 प्रतिशत जबकि क्रेडिट
कार्ड की 8.49 प्रतिशत शिकायतें आई बाकी की शिकायतें पेंशन, फालतू के चार्ज लोन जमा आदि से जुड़ी थी।